आदरणीय यशवंत जी, भड़ास4मीडिया, नमस्कार। आपके मीडिया पोर्टल के बारे में जानकर काफी खुशी हुई। मैं 73 वर्षीय, एक अपाहिज वृद्ध हूँ। दमे एवं हृदय रोग से भी पीड़ित हूँ। साथ में कई अन्य बीमारियाँ भी है। मैं आपके मीडिया पोर्टल के माध्यम से अपनी भड़ास निकालना चाहता हूँ, जो सुशासन की सरकार, बिहार सरकार से संबंधित है।
मैंने आज ही प्रभात खबर में प्रकाशित बुजुर्गों की स्थिति को भी पढ़ा, जिसमें यह कहा गया है कि ‘‘बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने पुलिस महानिदेशक को बिहार मेन्टेनेन्स एण्ड वेलफेयर ऑफ पैरेंटस एण्ड सिटीजन रूल्स 2012 को लागू करने से संबंधित रिपोर्ट देने को कहा है।‘‘ तथा बुजुर्गों के हितों की कई बातें लिखी हुई थी।
परन्तु, बिहार में ठीक इसके विपरीत, मेरे (बुजुर्ग के) साथ काफी अन्याय हो रहा है। मेरी वैध जमीन पर जिला प्रशासन, भोजपुर द्वारा खुलकर अवैध कब्जा करवाया जा रहा है। इस संबंध में मेरे पुत्र प्रमोद कुमार सिंह द्वारा अंचल कार्यालय से लेकर माननीय मुख्यमंत्री तक को आवेदन एवं सारे वैध प्रमाण दिये गये हैं। यहाँ तक कि ‘सरकार‘ द्वारा मेरी जमीन के मामले में 20 वर्ष पूर्व की गई गलती को सुधार लेने का पत्र (देखें अंचलाधिकारी का पत्र- पत्रांक 204 दिनांक 13/03/2007 पत्र संलग्न), ‘सरकार‘ द्वारा भूमि की सुरक्षा हेतु पत्र (देखें पुलिस अधीक्षक का पत्र- पत्रांक 2305/गो. आरा दिनांक 20/07/2009, पत्र संलग्न), को भी जिला प्रशासन (डीएम, एसपी, निबंधक एवं थाना) के समक्ष प्रस्तुत किया गया, परन्तु जिला प्रशासन द्वारा पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर मेरे जमीन की सुरक्षा करने के बजाय उल्टे अवैध कब्जा करवाया जा रहा है।
एक अपाहिज वृद्ध की संपत्ति ‘सरकार‘ से सुरक्षा मांगने के नाम पर लुटवा दी जायेगी, ऐसा तो कल्पना से भी परे था! एक तो मेरे पुत्र को फर्जी एफ आई आर में फंसाया गया (कांड सं0-145/13, नगर थाना आरा भोजपुर), जिससे मेरी बिमारी में अधिकता आयी। लगा कि पुनः हृदयाघात का शिकार हो जाऊँगा, परन्तु मेरे पुत्र के सामने होने के कारण मैं हृदयाघात से बचा।
इधर, सरकार द्वारा बुजुर्गों की सुरक्षा की बड़ी-बड़ी बातें अखबारों के माध्यम से कही जा रही है, परन्तु कड़वा सत्य यह है कि मैंने स्वयं दिनांक 16/05/2013 को ही मा0 मुख्यमंत्री बिहार, डीजीपी बिहार, डीएम भोजपुर, एसपी भोजपुर एवं सभी अखबारों को आवेदन एवं आवेदन की प्रतियाँ दी थी। परन्तु आज तक, मेरे द्वारा दिये गये आवेदन पर किसी प्रकार की कारवाई न करने से यह प्रतीत होता है कि यह सुशासन की सरकार केवल वृद्धों को अखबारी आश्वासन देने का कार्य करती है और हकीकत में वृद्धों एवं लाचारों की जमीन लुटवाने का कार्य करती है। अपने को सम्मानित अखबार कहने वाले अखबारों ने भी इस वृद्ध की सुध नहीं ली। नहीं तो क्या कारण है कि सारे वैध कागजातों एवं आवेदनों के बाद भी जिला प्रशासन भोजपुर एवं बिहार सरकार द्वारा विधिसम्मत कारवाई नहीं की जा रही है? एक तरफ भोजपुर जिला प्रशासन मेरे निर्दोष पुत्र को मारना या फँसाना चाहती है तो दूसरी ओर मेरी वैध जमीन को लुटवा देना चाहती है। ऐसी दोनों ही स्थिति में मेरे समक्ष मरने के सिवा कोई विकल्प नहीं बचेगा। जबकि मैं या मेरा पुत्र इस विषय में कोई भी खुली बहस करने को तैयार हैं।
आशा है कि, मेरी इस पीड़ा को आप बिहार सरकार तक अवश्य ही पहुँचाते हुये हम बुजुर्गों के बाकी बचे चंद दिनों को सँवारने का पुनीत कार्य करेंगे।



एक पीड़ित वृद्ध
सूरजदेव सिंह
गौसगंज,आरा,बिहार
वर्तमान- भुरकुण्डा बाजार,
रामगढ़, झारखण्ड।






