लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत पत्रकारों का काम केवल सूचना ग्रहण करना और उन्हें जन सामान्य के बीच सुलभ कराना होता है। परंतु कुछ पत्रकार अपवाद सरीखे होते हैं। ऐसे ही एक पत्रकार अरूण पांडे हैं जो पटना में दैनिक भास्कर के राजनीतिक संपादक हैं। उन्होंने पत्रकारिता को किनारे रख विधायी प्रक्रिया में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप कर रहे थे। लेकिन बिहार विधानसभा के सचिव ने उन्हें उनकी औकात बताते हुए कहा कि पांडे जी आज तो प्रेस से हैं न आप मत बोलिए।
दरअसल हुआ यह कि मंगलवार को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद अपने दल के विधायकों के साथ पैदल मार्च कर विधानसभा पहुंचे थे। विधानसभा के अध्यक्ष उदयनारायण चौधरी पहले ही मैदान खाली कर गये थे। इसलिए राजद सुप्रीमो को सचिव के कक्ष में जमना पड़ा। इसी क्रम में राजद सुप्रीमो सचिव को अपनी भाषा में दल बदल कानून और विधायकों के सशरीर उपस्थित होने का महत्व बता रहे थे। इस बीच उनके निर्देश पर वे नौ विधायक जिनके दल छोड़ने की बात कही गयी थी, ने हस्तलिखित आवेदन राजद के पक्ष में विधानसभा के सचिव को दिया। विधायकों ने पावती की मांग की। इस पर सचिव ने कुछ आनाकानी करने का प्रयास किया। इसी मुद्दे पर अरूण पांडे टपक पड़े। कहने लगे कि आवेदन की पावती जरूर मिलनी चाहिए। इस पर विधानसभा के सचिव ने उन्हें गौर से देखा और पूछा – पांडे जी, आप तो प्रेस से ही हैं न? सवाल सुनकर पांडे जी बंगले झांकने लगे और चुपचाप बैठ गये।
पटना से 'अपना बिहार डाट ओआरजी' के संपादक नवल कुमार की रिपोर्ट.






