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बिहार में मीडिया पर दबाव : सूचना निदेशक ने लिखा पत्र संतुष्‍ट नहीं हैं सूचना मंत्री

जस्टिस मार्कंडेय काटजू का बयान गलत नहीं है कि बिहार में मीडिया की आजादी पर पहरा है. बिहार में सरकार के खिलाफ खबर लिखने वालों को परेशान किया जाता है. अर्से से यहां के पत्रकार कहते चले आ रहे हैं कि नीतीश सरकार ने मीडिया को पंगु बना रखा है. जो पत्रकार या अखबार इन लोगों के खिलाफ आवाज उठाता है उसके तरीके से निपटा दिया जाता है. प्रबंधन पर दबाव डालकर पत्रकार को हटवा दिया जाता है या फिर उसका तबादला ऐसी जगह करवा दिया जाता है, जो उसके लिए काला पानी की सजा जैसा होता है.

जस्टिस मार्कंडेय काटजू का बयान गलत नहीं है कि बिहार में मीडिया की आजादी पर पहरा है. बिहार में सरकार के खिलाफ खबर लिखने वालों को परेशान किया जाता है. अर्से से यहां के पत्रकार कहते चले आ रहे हैं कि नीतीश सरकार ने मीडिया को पंगु बना रखा है. जो पत्रकार या अखबार इन लोगों के खिलाफ आवाज उठाता है उसके तरीके से निपटा दिया जाता है. प्रबंधन पर दबाव डालकर पत्रकार को हटवा दिया जाता है या फिर उसका तबादला ऐसी जगह करवा दिया जाता है, जो उसके लिए काला पानी की सजा जैसा होता है.

अखबारों के विज्ञापन भी रोकने के आरोप सामने आए हैं. इन सभी आरोपों की बुनियाद पर ही जस्टिस काटजू ने कहा था कि बिहार में मीडिया पर अघोषित सेंसर लगा हुआ है. उन्‍होंने इसके लिए तीन सदस्‍यीय जांच कमेटी की गठित की है. बिहार में मीडिया पर सरकार दबाव की बात एक बार फिर साबित हो गई है. बिहार सरकार के सूचना निदेशक ने शिवकपूर सिन्‍हा ने पटना के सभी अखबारों एवं इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के वरिष्‍ठों को पत्र भेजकर सरकारी प्रेस विज्ञप्ति को प्रमुखता से प्रसारित-प्रकाशित न किए जाने पर नाराजगी जताई है.

शिवकपूर ने अपने पत्र में लिखा है कि सभी अखबार एवं इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के लोग सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा भेजी गई विज्ञप्तियों तथा फोटो को प्रमुखता से नहीं छाप रहे हैं. इससे राज्‍य के सूचना मंत्री भी संतुष्‍ट नहीं हैं. अब आप इशारों ही इशारों में समझ सकते हैं कि सूचना मंत्री असंतुष्‍ट हैं तो क्‍या-क्‍या कर सकते हैं. अब सूचना विभाग के निदेशक तय करवाएंगे कि उनकी खबरों प्रकाशित करना है या नहीं. यह पत्र ही बता रहा है कि बिहार में मीडिया पर कितना दबाव है.

एक तरीके से निदेशक द्वारा भेजा गया पत्र शिकायती नहीं बल्कि अपरोक्ष रूप से धमकी ही है कि उनके द्वारा सरकारी खबरों को प्रमुखता नहीं दी जा रही है. उन्‍हें प्रमुखता दी जाए नहीं तो भविष्‍य में कुछ भी हो सकता है क्‍योंकि सूचना मंत्री असंतोष व्‍यक्‍त कर रहे हैं. जस्टिस काटजू द्वारा गठित समिति को इस मामले को भी संज्ञान में लेना चाहिए. नीचे राज्‍य के सूचना निदेशक द्वारा सभी संस्‍थानों को भेजा गया पत्र. 

 

 
 

 
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