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बिहार विधानसभा की प्रेस सलाहकार समिति में सिर्फ तीन गैर-सवर्ण

बिहार विधान सभा की प्रेस सलाहकार समिति एक महत्वपूर्ण समिति है। यही समिति पत्रकारों से जुड़े मामलों को देखती है। समिति के सभापति स्वयं विधानसभा के अध्यक्ष होते हैं, जबकि कोई पत्रकार समिति का उपाध्यक्ष होता है। इस प्रतिष्ठापूर्ण समिति में सदैव से सवर्ण पत्रकारों का आधिपत्य रहा है, जबकि मीडिया में बड़ी संख्या में दलित व पिछड़ी जाति के पत्रकार भी हैं। लेकिन उनको कभी सम्मानजनक प्रतिनिधित्व प्रेस सलाहकार समिति में नहीं मिला।

बिहार विधान सभा की प्रेस सलाहकार समिति एक महत्वपूर्ण समिति है। यही समिति पत्रकारों से जुड़े मामलों को देखती है। समिति के सभापति स्वयं विधानसभा के अध्यक्ष होते हैं, जबकि कोई पत्रकार समिति का उपाध्यक्ष होता है। इस प्रतिष्ठापूर्ण समिति में सदैव से सवर्ण पत्रकारों का आधिपत्य रहा है, जबकि मीडिया में बड़ी संख्या में दलित व पिछड़ी जाति के पत्रकार भी हैं। लेकिन उनको कभी सम्मानजनक प्रतिनिधित्व प्रेस सलाहकार समिति में नहीं मिला।

वर्तमान प्रेस सलाहकर समिति में 28 लोग हैं, उसमें से मात्र तीन गैर-सवर्ण हैं। इस दिशा में अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने कोई पहल नहीं की और न मीडिया कंपनियों ने प्रेस सलाहकार समिति के लिए किसी गैर-सवर्ण पत्रकार का नाम सुझाया। वैसी स्थिति में अध्यक्ष के भी हाथ बंध जाते हैं। यह विडंबना है कि 1990 के बाद से विधानसभा के सभी अध्यक्ष दलित व पिछड़ी जातियों के ही रहे हैं, इसके बाद भी प्रेस सलाहकार समिति का चेहरा नहीं बदला और न बदलने के लक्षण ही दिखते हैं। लेकिन मीडिया में सक्रिय दलित व पिछड़े वर्ग के पत्रकार भी अपने प्रतिनिधित्व व सम्मान की बात उठाने लगे हैं। वैसी स्थिति में उम्मीद की जा सकती है कि शायद विरोध के स्वर के बाद प्रेस सलाहकार समिति का चेहरा व चरित्र भी बदले।

बिहार से आई एक चिट्ठी पर आधारित.

भड़ास से संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.

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