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बिहार विरोधी है टाइम्‍स ऑफ इंडिया का मालिक साहू-जैन समूह

पटना : बिहार की राजधानी पटना का स्काई लाइन टाइम्स ऑफ इंडिया के होर्डिंगों से पटा पड़ा है। कहा जा रहा है टीओआई पटना संस्करण की रिलांचिंग की जा रही है। इसी वजह से यह ब्रांड प्रमोशन का प्रचार यज्ञ चलाया जा रहा है। इसी संदर्भ में 27 मई, 2012 रविवार को राजधानी के न्यू पटना क्लब में शाम 7:30 बजे से ब्रांड प्रमोशन के मुतल्लिक बालीवुड के गायक जावेद अली का लाइव कंसर्ट कराया जा रहा है। शुक्रवार को टाइम्स के पटना संस्करण में बिहार को औद्योगिक विकास की तरफ ले जाने वाले राइजिंग बिहार का सपना दिखलाने वाले एक पूरे पेज का आलेख प्रस्तुत किया गया है। विगत कई दिनों से राइजिंग बिहार के नाम पर टीओआई के पन्ने पर पन्ने रंगे जा रहे हैं। बताया जाता है कि इस सारे उपक्रम के पीछे टाइम्स ऑफ इंडिया के ब्रांड-प्रमोशन की मंशा है।

पटना : बिहार की राजधानी पटना का स्काई लाइन टाइम्स ऑफ इंडिया के होर्डिंगों से पटा पड़ा है। कहा जा रहा है टीओआई पटना संस्करण की रिलांचिंग की जा रही है। इसी वजह से यह ब्रांड प्रमोशन का प्रचार यज्ञ चलाया जा रहा है। इसी संदर्भ में 27 मई, 2012 रविवार को राजधानी के न्यू पटना क्लब में शाम 7:30 बजे से ब्रांड प्रमोशन के मुतल्लिक बालीवुड के गायक जावेद अली का लाइव कंसर्ट कराया जा रहा है। शुक्रवार को टाइम्स के पटना संस्करण में बिहार को औद्योगिक विकास की तरफ ले जाने वाले राइजिंग बिहार का सपना दिखलाने वाले एक पूरे पेज का आलेख प्रस्तुत किया गया है। विगत कई दिनों से राइजिंग बिहार के नाम पर टीओआई के पन्ने पर पन्ने रंगे जा रहे हैं। बताया जाता है कि इस सारे उपक्रम के पीछे टाइम्स ऑफ इंडिया के ब्रांड-प्रमोशन की मंशा है।

मगर यदि तथ्यों के आईने में देखा जाये तो क्या साहू जैन (टाइम्स ऑफ इंडिया समूह के मालिक) परिवार की राइजिंग बिहार में कितनी रुचि है- तो यह जानना बड़ा ही हृदय-विदारक होगा। जी हां, कभी इसी खानदान की संयुक्त बिहार में रोहतास इंडस्ट्री नाम की बड़ी इंडस्ट्री हुआ करती थी। इस इंडस्ट्री में डालडा से लेकर साबुन, सीमेंट, एस्बेस्टस सहित कई अन्य सामग्रियों का उत्पादन हुआ करता था, जिसमें पचासों हजार मजदूर काम किया करते थे और जिस पर आस-पड़ोस के लाखों परिवारों की अर्थ-व्यवस्था आधारित थी। मगर जिस बिहार ने साहू-जैन परिवार को फर्श से अर्श तक पहुंचाया, उस बिहार को इस खानदान ने क्या तोहफा दिया- इतने बड़े उद्योग समूह की तालाबंदी, पचासियों हजार मजदूरों की छंटनी, उन पर आश्रित परिवारजनों का अर्थिक विनाश और रोहतास उद्योग पर आधारित गैर-मजदूर, स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक अवसर का विनाश। यह है साहू-जैन परिवार के बिहार- प्रेम की नंगी तस्वीर।

यह नंगा सच बहुत ही वीभत्स है। यदि आप और भी अंदर घुसकर देखना चाहते हैं तो आपको पता चलेगा कि रोहतास के ये मजदूर आज तक अपना पावना नहीं पा सके हैं। इनको अभी तक पीएफ, ग्रेच्युटी एवं अन्य वैधानिक बकायों का भुगतान नहीं मिल सका है। इसके लिए इस खानदान ने तमाम कानूनी दाव पेंचों का इस्तेमाल किया जिसकी वजह से आज तक रोहतास के मजदूरों को उनके वाजिब हक का भुगतान नहीं प्राप्त हो सका है। इस खानदान के बिहार प्रेम की असलियत तो तब और भी स्पष्ट हो जाती है, जब आपको पता चलेगा कि विगत सालों में कभी लालू जी के रेल मंत्रालय ने रोहतास उद्योग समूह की जमीन पर उद्योग लगाना चाहा तो उस योजना में भी कानूनी पेंच लगाकर साहू-जैन परिवार ने उस योजना का तिया-पांचा कर दिया। साहू जैन परिवार की बिहार को यही सौगात है।

उसी तरह इस परिवार ने एसकेजी नाम की अपनी कंपनी, जो शराब सहित कई अन्य किस्म की उत्पाद बनाया करती थी, की सभी ईकाइयों को बंद कर बिहार के निवासियों को नायाब तोहफा दिया। आज जब ‘सुशासन’ की सरकार नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे जाकर पूंजीपतियों से बिहार में उद्योग लगाने की गुहार कर रही है, उस वक्त इस खानदान का ट्रैक-रिकार्ड खंगालें तो वह और भी वीभत्स नजर आयेगा। ‘सामाजिक न्याय के साथ विकास’ वाली इस मौजूदा राज्य सरकार के कार्यकाल में जहां इस साहू-जैन खानदान ने टाइम्स ऑफ इंडिया के कुम्हरार स्थित अपने प्रिंटिंग प्रेस को बंदकर 44 मजदूरों को नौकरी से निकाल दिया। आज टाइम्स ऑफ इंडिया न्यूज पेपर इंप्लाइज यूनियन इस मामले की लड़ाई भारत के सर्वोच्च न्यायालय में लड़ रही है। आपको यह जानकर और भी आश्चर्य होगाकि साहू जैन खानदान ने अपना छापाखाना बंद करने का फैसला तब लिया जब टी.ओ.आई. के मजदूरों ने मणिसाना वेतन आयोग द्वारा निर्धारित वेतनमान की मांग की। उन्होंने सोचा कि प्रिंटिंग प्रेस बंद कर वे ‘न रहेगा बांस- न बजेगी बांसुरी’ की स्थिति पैदा कर देंगे। मगर आज भी इस बंदी के खिलाफ हटाये गये मजदूर टाइम्स ऑफ इंडिया न्यूज पेपर इंप्लाइज यूनियन के बैनर तले विगत 16 जुलाई, 2011 से अनवरत धरना चला रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा लड़ रहे हैं।

अब आइये इस साहू-जैन परिवार की ‘सामाजिक न्याय’ के सरकार के जमाने के कारनामों की बातें करें। सामाजिक न्याय की सरकार के जमाने में जब श्रीलालू प्रसाद यादव जी मुख्यमंत्री थे और श्री वशिष्ठ नारायण सिंह जी श्रममंत्री थे, उस जमाने में भी इस खानदान ने पटना से प्रकाशित हो रहे टाइम्स ऑफ इंडिया समूह के प्रतिष्ठित हिंदी अखबार ‘नवभारत टाइम्स’ को बंद कर दिया था और उस अखबार से जुड़े सैकड़ों पत्रकार, गैर पत्रकार कर्मियों को नौकरी से निकाल कर सड़क पर ला दिया था। यह था साहू-जैन खानदान का बिहार को दिया गया तोहफा। इन घटनाओं के आलोक में ही बिहार के लोगों को आज टी.ओ.आई. के आज के ब्रांड-प्रमोशन की कोशिशों को देखने की जरूरत है। क्या आपको लगता है कि भगवान महावीर के करुणा और प्रेम की शिक्षाओं से भरे महान धर्म को मानने का दावा करने वाले इस साहू जैन खानदान के दिल में बिहार और बिहारवासियों के लिए घृणा के सिवाय और कुछ है क्या?

टी.ओ.आई. न्यूज पेपर इंप्लाइज यूनियन, पटना द्वारा जारी.

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