भोपाल : पिछले एक साल से जबसे हैथ्वे बीटीवी भोपाल के संपादक रवीन्द्र कैलासिया बने हैं तब से लेकर अब तक बीटीवी के 2 दर्जन से ज्यादा कर्मचारी संस्थान को बाय-बाय कह चुके हैं और बाकी बचे कर्मचारी भी मौका देख निकलने की तैयारी में हैं। कारण संपादक जी का तानाशाह रवैया। रविवार को ही संपादक साहब ने एक रिपोर्टर से बदतमीजी की जिससे रिपोर्टर के आत्म सम्मान पर ठेस पहुंचीं और संपादक साहब को नौकरी छोड़ने का बोलकर निकल गया। संपादक की तानाशाही का विवरण कुछ इस प्रकार है-
1- संपादक जी ये नहीं जानते कि उनके साथ एक पढ़ा-लिखा बुद्धिजीवी तबका काम कर रहा है लेकिन जनाब उनसे घर के नौकर से भी बदतर व्यवहार करते हैं।
2- विभाग प्रमुखों को उनके ही जूनियरों के समने जलील करना, साथ ही बेफिजूल की बातों पर कर्मचारियों को बेईज्जत करना।
3- कर्मचारियों की एक ना सुनना और स्वभाविक समस्या बताने पर भी उन्हें मक्कार कहकर जलील करना।
4- संपादक साहब को जब किसी कर्मचारी से काम हो तो उसे किसी भी वक्त बुला लेना और अगर उसकी छुट्टी हो तो भी बुलाने पर कर्मचारी अपना धर्म समझकर आ जाते हैं, पर जब कर्मचारी को कोई काम हो तो उसके लाख निवेदन करने के बावजूद भी शिफ्ट के समय में बदलाव ना करना और उसके हक की छुट्टी मांगने पर भी नहीं देना। साथ ही उससे दुर्व्यवहार करना।
5- कर्मचारी द्वारा कितना भी अच्छा काम करने पर उसे प्रोत्साहित करने की बजाए काम में बेमत्लब की कमी निकालना और उस पर जलील करना। जिससे कर्मचारियों के अंदर अच्छा काम करने की इच्छा अब खत्म हो चुकी है।
6- झूठ बोलने की आदत इनमें इतनी है कि यह कर्मचारियों में विरोधाभास पैदा कर लड़वाने में भी विश्वास रखते हैं।
7- जो भाषा का प्रयोग यह चपरासी से करते हैं, उसी भाषा का प्रयोग यह संस्थान के विभाग प्रमुखों से भी करते हैं।
यह तो थे संपादक रवींद्र कैलासिया के वो कुछ लक्ष्ण जिनकी वजह से अब तक 2 दर्जन से ज्यादा कर्मचारी संस्थान को बाय-बाय कर चुके हैं और बाकी बचे कर्मचारी भी मौका देख निकलने की तैयारी में हैं। ऐसा नही है कि इनका विवादों से नाता ना रहा हो, यह कुछ दिनों पहले एक लड़की रिपोर्टर को समय पर कवरेज करने ना पहुंचने पर कैमरामैन को रास्ते में ही उसे गाड़ी से उतारने के आदेश दे चुके हैं, वो भी तब जब उस लड़की के पास बस से आने तक के पैसे नहीं थे। बेचारी रिपोर्टर पैदल 5 किलोमीटर चलकर एमपी नगर स्थित दफ्तर पहुंची।
कुछ दिन पहले स्टूडियो से डोंगल चोरी हो गया। जिसकी चोरी का इल्जाम प्रोडक्शन के एक सीनियर कर्मचारी पर आसानी से लगा दिया। और अगले ही दिन जब वो मिल गया ऑफिस में ही तो संपादक साहब ने उस सीनियर कर्मचारी से माफी मांगने तक की भी जहमत नहीं उठाई। इससे पहले वो मार्केटिंग में भी दखल देने की कोशिश कर चुके हैं, जिसके लिए हाल ही में प्रबंधन द्वारा उन्हें फटकार लगाई चा चुकी है। खबर यह भी है कि बहुत जल्दी ही चैनल के वो लोग, जो शुरुआती दौर से जुड़े हैं वह भी संपादक द्वारा की जा रही जलालत के कारण संस्थान छोड़ने का मन बना चुके हैं और बहुत ही जल्द इस्तीफा दे देंगे।
यह तो हुई संस्थान के कर्मचारियों की बात। कैलासिया जी दूसरे चैनल्स से विजुअल ट्रांसफर के लिए आने वाले कैमरामैनों और रिपोर्टरों को भी दुत्कार के भगा चुके हैं और आज हालत यह हैं कि कोई भी चैनल वाला अब बीटीवी के कैमरामैन को विजुअल नहीं देता। अब सवाल यह उठता है कि आखिर क्या मजबूरी है हैथ्वे भास्कर की कि रवींद्र कैलासिया को अब तक झेल रही है। क्योंकि हालात तो यह बन चुके हैं कि जिस दिन भी कर्मचारियों को कोई मौका मिला सबके सब एक साथ भी निकल सकते हैं। और आज स्थिति यह है कि कोई भी योग्य व्यक्ति बीटीवी में नौकरी के लिए आने में इच्छुक नहीं हैं। और जो आ भी रहे हैं वो वही लोग हैं जिन्हें संपादक साहब के बारे में जानकारी नहीं है। या जो बिल्कुल नए हैं। अगर इस खबर को भास्कर समूह के मालिक पढ़ रहे हों तो कृपया कर कोई उचित कदम उठाएं वरना जो नाम बीटीवी ने बनाया है वो मिट्टी में मिलता चला जाएगा जो शायद भास्कर की नियती में नहीं है।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






