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बीटीवी भोपाल से फिर दो कर्मचारियों ने इस्‍तीफा दिया

बीटीवी भोपाल में पिछले दो महीने से रूका कर्मचारियों के चैनल छोड़ने का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो गया है। एक हफ्ते के अंदर करीब दो लोगों ने चैनल को अलविदा कह दिया है। चैनल के एक काबिल वीडियो एडिटर ने संपादक के रवैये के चलते नौकरी छोड़ दी है। उस वीडियो एडिटर ने संपादक को नोटिस भी दिया लेकिन संपादक रवींद्र कैलासिया ने उसका नोटिस स्वीकार करने से ही मना कर दिया साथ ही उसकी तनख्‍वाह और बचा हुआ पैसा भी रोक लिया। इसके अलावा एक मामूली विवाद को सही तरीके से डील ना कर पाने के चलते एक कैमरा मैन ने भी चैनल को अलविदा कह दिया।

बीटीवी भोपाल में पिछले दो महीने से रूका कर्मचारियों के चैनल छोड़ने का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो गया है। एक हफ्ते के अंदर करीब दो लोगों ने चैनल को अलविदा कह दिया है। चैनल के एक काबिल वीडियो एडिटर ने संपादक के रवैये के चलते नौकरी छोड़ दी है। उस वीडियो एडिटर ने संपादक को नोटिस भी दिया लेकिन संपादक रवींद्र कैलासिया ने उसका नोटिस स्वीकार करने से ही मना कर दिया साथ ही उसकी तनख्‍वाह और बचा हुआ पैसा भी रोक लिया। इसके अलावा एक मामूली विवाद को सही तरीके से डील ना कर पाने के चलते एक कैमरा मैन ने भी चैनल को अलविदा कह दिया।

दरअसल जब से रवींद्र कैलासिया ने संपादक की कमान सभ्हाली है तब से लेकर अब तक करीब 30 लोगों ने चैनल को अलविदा कह दिया है। जिस मजबूत टीम की बदौलत बीटीवी ने शहर में पहचान बनाई थी, वो पहचान अब मिट चुकी है। कर्मचारी अब सिर्फ चैनल में समय काट रहे हैं और ठीक मौका मिलने पर चैनल छोड़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि चैनल के अंदर की राजनीति से तंग होकर बहुत जल्द ही 4 वरिष्ठ लोग भी बीटीवी छोड़कर जाने वाले हैं।

अब बात करते हैं कंपनी के एचआर विभाग की। कंपनी का एचआर कर्मचारियों की देखरेख उनकी समस्या को समझने उनको होने वाली परेशानियों को समझने के लिए होता है लेकिन यहां उल्टा है। एचआर मैनेजर आरसी चतुर्वेदी आए दिन कर्मचारियों को परेशान करते रहते हैं। 15 मिनट किसी कारणवश कर्मचारी लेट हो जाए तो उसकी आधे दिन की तनख्‍वाह काट ली जाती है। फिर चाहे वो कर्मचारी काम होने पर दो घंटे देरी से जाए, पर वो कंपनी को नहीं दिखता। कोई कर्मचारी अगर अटेंडेंस रजिस्टर पर साईन करना भूल जाए तो उसकी एब्सेंट लगा दी जाती है। कंपनी यह नहीं सोचती ह‍ि इतनी कम तनख्‍वाह में से कर्मचारी के महीने के 300-400 रुपए काट लिए तो उसके महीने का पूरा बजट बिगड़ जाता है। हद तो देखिए कर्मचारी को मिलने वाला बोनस भी कर्मचारी की तनख्‍वाह में से ही हर महीने काटा जाता है और दीवाली पर दे दिया जाता है। कर्मचारी के पीएफ का दूसरा हिस्सा जो कंपनी को देना चाहिए वो भी कर्मचारी की सैलरी से ही काटा जाता है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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