Tarun Kumar Tarun : जब पूरा देश मनोज नामक वहशी के लिए दरिंदा, नर-पिशाच और न जाने किन-किन कठोर शब्दों का इस्तेमाल कर आक्रोश का इजहार कर रहा है, पटना से बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर ने 'उन्हें', 'उन्होंने', 'थे' जैसे आदरसूचक शब्दों के साथ मनोज को संबोधित करते हुए एक रिपोर्ट लिखी है. मणिकांत ठाकुर मीडिया के बड़े नाम रहे हैं, और उनका अनुभव दशकों का रहा है. लगता है वे उस दिग्विजय से प्रभावित हैं जो लादेन जैसे आतंकवादियों को लादेन जी कहने में संकोच नहीं करते. वैसे, बीबीसी का भाषाई संस्कार लगातार पतनशील होता जा रहा है.
Swati Arjun : तरुण जी, अगर आप बीबीसी हिंदी के पाठक या श्रोता रहे हैं तो आपको पता होना चाहिए कि, बीबीसी में किसी के लिए भी उसको, उसे, था जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया जाता. फिर चाहे वो दाऊद इब्राहिम हो, ओसामा बिन लादेन, नाथू राम गोडसे या कोई बलात्कारी. ये एक पॉलिसी मैटर है जिसे हमारे सभी वरिष्ठ या कनिष्ट कर्मचारी फॉलो करते हैं. हालांकि मैं जानती हूं कि इस ख़बर से आप भी उद्देवलित हैं इसलिए ऐसा कह रहे हैं लेकिन मैं ये पूछना चाहती हं जिस देश और समाज में बलात्कारियों, यौन अपराधियों और बीमार मानसिकता वाले लोगों को समाज ने सहर्ष स्वीकार कर रखा है वहां उन्हें आदरसूचक शब्द से संबोधित करने से कितना फर्क पड़ जाएगा.
फेसबुक से.






