Alok Joshi : Ram Dutt Tripathi लंबे अनुभवों से गुजरे हैं। ज़िंदगी ने उन्हें पकाया ही नहीं है, बेहद शिष्ट और विनम्र भी बनाया है। इसीलिए बीबीसी से वक़्त से पहले रिटायर होने की कड़वाहट उनके स्टैटस में नहीं झलकती। कह रहे हैं बीबीसी विश्व की एक अद्वितीय और महान संस्था है। लेकिन सच क्या है वो खुद भी जानते हैं। बीबीसी में जितना भाई भतीजावाद, जितना अंधेर और जैसी चापलूसी चमचागिरी चलती है, वो अगर भारत के किसी अखबार या चैनल में हो जाए तो मीडिया के मतवाले उनका जीना हराम कर देंगे। .. ऐसा नहीं है तो किसी तर्क से सिद्ध कीजिए कि उमर फारुक, मणिकांत ठाकुर और राम दत्त त्रिपाठी के सामने ऐसी स्थिति क्यों आई कि उन्हें नौकरी छोड़ने या रिटायर होने का फैसला करना पड़ा। और उनसे पहले न जाने कितने लोगों के सामने ऐसी ही स्थिति और भी आ चुकी है। ..
Alok Joshi : ब्रिटेन में रंगीन टीवी देखने की सालाना फीस £145.50 है। यानी आज के रेट पर करीब पंद्रह हजार रुपए। और इस फीस में आपको सिर्फ पांच टेरेस्ट्रियल चैनल देखने को मिलते है। जिनमें से तीन आपको शायद देखने लायक न लगें। इसके ऊपर कुछ देखना है तो फिर केबल कनेक्शन या डिश लगवाने का पैसा अलग। और उसमें भी कुछ चैनलों के बेसिक पैक के बाद एक एक चैनल चार से छह पाउंड (400 से 600 रुपए) तक का होता है। .. आज की रेट लिस्ट से वहां ताज़ा दूध 44 पेंस यानी लगभग पैंतालीस रुपए लीटर है और स्काच की एक बोतल बीस पाउंड यानी करीब दो हजार रुपए की मिल रही है। अब अपने टीवी बिल का हिसाब लगाइए और समझिए कि चैनल चलानेवाली कंपनियां घाटे में क्यों हैं। और याद रखिए कि भारत में हर वो आदमी कोई पैसा नहीं दे रहा है जिसके घर टीवी है।
पत्रकार आलोक जोशी के फेसबुक वॉल से.





