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बेइमान साधना प्रबंधन के हाथों जमकर इस्तेमाल होने के बाद नैय्यर आजाद अब हो गए आजाद

मीडिया की दुनिया में तेज़ी से डूबता जहाज़ बन गया है साधना न्यूज़। वर्ष 2012 में सहारा चैनल में अच्छी पोजीशन छोड़ साधना न्यूज़ आए नैय्यर आजाद ने साधना न्यूज़ को बाय-बाय कह दिया है। साधना प्रबंधन ने नय्यर के लगभग एक लाख रुपये के बिलों का भुगतान नहीं किया था जिसके चलते नय्यर ने इस्तीफ़ा दे दिया। ये बिल उस समय के है जब वो बिहार में बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत थे और उसी दौरान एक बाबूजी नाम के शख्स के कहने पर प्रभातम ग्रुप के लिए इलाहाबाद में होने वाले कुम्भ के मीडिया सेंटर के लिए लखनऊ की यात्रा किया करते थे। अब इस्तीफे के बाद नय्यर ने साधना न्यूज़ पर मुकदमा करने का निर्णय लिया है।

मीडिया की दुनिया में तेज़ी से डूबता जहाज़ बन गया है साधना न्यूज़। वर्ष 2012 में सहारा चैनल में अच्छी पोजीशन छोड़ साधना न्यूज़ आए नैय्यर आजाद ने साधना न्यूज़ को बाय-बाय कह दिया है। साधना प्रबंधन ने नय्यर के लगभग एक लाख रुपये के बिलों का भुगतान नहीं किया था जिसके चलते नय्यर ने इस्तीफ़ा दे दिया। ये बिल उस समय के है जब वो बिहार में बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत थे और उसी दौरान एक बाबूजी नाम के शख्स के कहने पर प्रभातम ग्रुप के लिए इलाहाबाद में होने वाले कुम्भ के मीडिया सेंटर के लिए लखनऊ की यात्रा किया करते थे। अब इस्तीफे के बाद नय्यर ने साधना न्यूज़ पर मुकदमा करने का निर्णय लिया है।

कहा ये भी जा रहा है कि साधना न्यूज़ के सीनियर और जूनियर मालिक "गुप्ता" के दबाव में आकर उन्हें बिहार में काम करते हुए भी उत्तर प्रदेश में कुम्भ मेले का भी काम देखने का हुक्म दिया गया, उन्हें कई बार सूचना विभाग के अधिकारियों के साथ सेटिंग करने के लिए लखनऊ की यात्रा भी करनी पड़ती थी। उन्होंने अपने बिलों के भुगतान की बात की तो उन्हें ये कहकर चुप करा दिया गया कि प्रबन्धन उनके बिल को जल्द ही पास कर देगा। आश्वासन बार बार उन्हे बाबू जी के खेमे से मिल रहे थे मगर आजतक वो रुपये नहीं मिले। उन्होंने कुम्भ मेले के दौरान तीन महीने इलाहाबाद में भी बिताए।  

उनके पटना पहुंचते ही प्रबन्धन नें उन्हे नोएडा ऑफिस प्रमोट करके बतौर न्यूज़ एडिटर भेज दिया। साधना प्रबन्धन ने ट्रांसफर की चिट्ठी में ये लिखा था कि कुम्भ में उनके काम से खुश होकर प्रबन्धन ने उन्हे बतौर एसोसिएट एडिटर नोएडा ऑफिस में शिफ्ट करने का निर्णय लिया है, मगर उन्हें ना तो ट्रान्सफर के पैसे ही दिए गए और ना तो उनको सैलेरी दी गयी।  बीच बीच में उन्हें प्रबन्धन बार बार उत्तर प्रदेश सरकार और बिहार सरकार से सिर्फ एड का काम करने का दबाव देती रहा लेकिन विजिबिलिटी न होने के चलते ऐसा हो न सका, मगर साधना प्रबन्धन नैय्यर आजाद को लागातार ये कहता रहा कि सरकारों से अपनी जान पहचान का फाएदा उठाएं। अब हालात ये है कि नैय्यर आजाद ने भी साधना न्यूज़ को बाय बाय कह दिया है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
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