: आज समाज अखबार के एमडी ने लिखा पेड न्यूज के खिलाफ लेख, उसी अंक में चेयरमैन पिता की साधारण मीटिंग्स की कई तस्वीरें व खबरें : यशवंतजी, नमस्कार। मैं आपको पेड न्यूज के मामले पर बहुत ही रूचिकर मसाला भेज रहा हूं। यूं समझिए कि पेड न्यूज के लाखों चूहे खाकर और पत्रकारिता की सारी आचार संहिताओं को ताक पर रखकर उसे सिर्फ अपने घर की बपौती बनाकर बिल्ली हज को जा रही है। बात बड़ी हंसी की है, इसलिए अपनी हंसी पर काबू रखते हुए पढ़े. मामला ये है कि गत हरियाणा विधानसभा चुनाव, जो अक्टूबर 2009 में था, उसमें मीडिया के पेड न्यूज आफर का जमकर फायदा उठाने वाले यानी पेड न्यूज के माध्यम से अपनी खूब कवरेज करवाने वाले हरियाणा के राजनीतिक परिवार ने अब पेड न्यूज के खिलाफ न्याय युद्ध छेड़ा है।
इस परिवार ने खुद का जो अखबार निकाला है- आज समाज, उसके 23 जनवरी के अंक में परिवार के सबसे छोटे और लाडले, जो अखबार के प्रबंध संपादक हैं, ने पेड न्यूज के खिलाफ प्रथम पृष्ठ पर संपादकीय लिखा है। हैरानी की बात ये है कि जिस अंक में नेता जी के प्रधान संपादक पुत्र पेड न्यूज पर तीखा संपादकीय लिख रहे हैं, उस अंक में उनके नेता पिता श्री ही छाए हुए हैं। नेता जी की साधारण मीटिंगों की तीन-तीन खबरें और दो बड़े-बड़े फोटो लगे हैं।
यशवंत भाई आप तो मीडिया की सारी बात जानते ही हो, सो आप तो आज समाज का नाम लेने से ही समझ गए होंगे। फिर भी पृष्ठभूमि लिख देता हूं। ये हरियाणा का बड़ा प्रसिद्ध राजनीतिक परिवार है, वो परिवार जो जेसिका लाला मर्डर के बाद पूरे देश की जुबान पर आ गया था। यानी जेसिका लाल हत्या के मामले में सजा काट रहे मनु शर्मा के पिता विनोद शर्मा का परिवार। यह वही परिवार है जिससे जुड़े सच उजागर करने के लिए मीडिया ने पूरे देश में हल्ला मचा दिया। जेसिका लाल हत्या मामले में इस परिवार के लाडले मनु शर्मा का नाम आने के बाद मीडिया ने हल्ला बोला था।
मीडिया की इस मार के बाद परिवार ने अपना खुद का अखबार आज समाज और टीवी चैनल इंडिया न्यूज हरियाणा शुरू किया था। कहा जाता है कि लोगों में छवि सुधारने के लिए करोड़ों खर्च कर डाले। आज समाज के प्रबंध संपादक अम्बाला शहर के विधायक विनोद शर्मा के छोटे पुत्र कार्तिक शर्मा हैं। कार्तिक शर्मा ने कल के अंक में पेड न्यूज के खिलाफ प्रथम पृष्ठ संपादकीय लिखा है। अब कार्तिक साहब की तारीफ भी सुनिए। वो बड़े सज्जन हैं। गत हरियाणा विधानसभा चुनाव में इनके पिता को पेड न्यूज की ज्यादा से ज्यादा कवरेज दिलवाने का काम स्वयं श्री कार्तिक ही करते थे। खासतौर पर दैनिक भास्कर और पंजाब केसरी के 2009 के अंबाला संस्करणों में सारा इतिहास दर्ज है। दुनिया का कितना बड़ा ज्वलनशील पदार्थ लाओ, ये इतिहास तो मिटेगा नहीं। कई अखबारों के मार्केटिंग विभाग के सूत्र कहते हैं कि पेड न्यूज के लिए भुगतान करने से लेकर सभी दूसरे काम कार्तिक ही देखा करते थे।
अब दूसरा अहम सवाल ये है कि कोई पूछे कि जब राजनेताओं ने अपने अखबार चला लिए और एक दिन में खुद की साधारण मीटिंगों की कई कई खबरें लगवा रहे हैं। फिर तो इनको पेड न्यूज की जरूरत ही नहीं रही, बल्कि यूं कहें कि इनको मीडिया की जरूरत नहीं रही। जिन नेता जी का यहां जिक्र हैं उन्होंने तो अम्बाला में अब प्रेस कांफ्रेंस भी करनी लगभग बंद ही कर दी है। उनको लगता है कि घर का जब अखबार हैं ही तो फिर क्यों भीड़ इकट्ठी करें, फोकट में चाय पिलाएं। एक खास बात और कि आज समाज, जो मुख्यत: अंबाला से प्रकाशित होता है, को 50 रुपए महीने की स्कीम पर चलाया जा रहा है। गांव-गांव जाकर टीमें ज्यादा से ज्यादा अखबार लगा रही हैं। यशवंत भाई मैं इन खबरों की स्केन कॉपी भी भेज रहा हूं।



एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






