Shambhunath Shukla : भड़ास नहीं होता तो खबरिया लोग अपनी ही खबरों से अनजान बने रहते। हम अखबार दुनिया जहान की खबरों को जानने के लिए नहीं अपने, अपने आसपास और अपने लोगों की खबरें ही जानने के लिए पढ़ते हैं। लेकिन अखबार पाठकों को उसकी या उसके सरोकारों से जुड़ी खबरें नहीं, वह छापता है कि अमुक जिले का कलेक्टर कौन बन गया अथवा फलां शहर में पुलिस कप्तान कौन है? आईएएस, आईपीएस, पीसीएस से लेकर थानों में नियुक्तियों की खबरें छापी जाती हैं। अमुक कलेक्टर कौन है या पुलिस कप्तान कौन है, मुझे नहीं लगता कि इसमें पाठकों को रत्ती भर भी दिलचस्पी होती है।
जिसे कलेक्टर से मिलना होता है वह नाम, धाम सब पता कर लेता है। दलाल सब बता देगा और बिना दलाल के आप न तो कलेक्टर से कोई काम करा सकते हैं न कप्तान से। अगर कोई अखबार अपने पाठकों के बीच सर्वे करवाए कि देश का उप राष्ट्रपति अथवा उप प्रधानमंत्री कौन है तो उसके ८० प्रतिशत पाठक कन्फ्यूजिया जाएंगे। मैंने एक बड़े पत्रकार, जो एक चैनल के संपादक भी रह चुके हैं, से पूछा कि अपने यहां उप प्रधानमंत्री कब से नहीं हुआ बोले- देवीलाल आखिरी उप प्रधानमंत्री थे। तब फिर ऐसी खबरें छापकर क्या फायदा? लेकिन आज तक यह नहीं छापा गया कि पत्रकारों के लिए बने वेजबोर्ड की सिफारिशें कहां लटकी हैं? अथवा उसकी सिफारिशें हैं कहां? यह भड़ास ही बताता है।
और यह भी कि हम जो खबरें पढ़ते हैं उन्हें हम तक लाने में किस सब एडिटर या चीफ सब एडिटर अथवा रिपोर्टर का रोल है। उन तमाम अनजाने अनजानी लोगों के उत्पीडऩ की खबरें छापकर भड़ास ने यह भी बताया है कि उसकी लोकप्रियता किसी भी अखबार से अधिक है। रोजाना करीब ५ लाख लोग भड़ास को देखते हैं। यह संख्या किसी भी अखबार अथवा टीवी चैनल के लिए शर्म की बात है। आने वाली 17 तारीख को भड़ास अपनी भड़ास के 5 साल पूरे कर लेगा। भड़ास और उसके संचालक यशवंत सिंह को इसके लिए बधाई और शुभ कामनाएं कि भड़ास अपनी यह यात्रा अनवरत बनाए रखे। चरैवति। चरैवति।
Acharya Sushil Gangwar Baat to sahi hai bhadas ne nayee karnti failyaee hai patrkarita jagat me .. jai bhadas ..
Haider Rizvi यशवंत जी बधाई के पात्र हैं
Hoti Lal yaswat ji ko hardikbadhai
Manoj Shukla vvvvvvvvvvvvvvvvvvv nice
Shashank Bhardawaj patrakar sb ka surve karte hai..kabhi apne bare mai bhi to sarve kare..kae ke dekhe,,,,
Praveen Upadhyay yaswant ji badhai k patra hai. Aur wo apne bebaaki k liye mashoor hai. Apne hi portel par apni buraai likh pana har kisi k bas ki baat nahi hai. "HIMMATWALA"
राकेश कुमार सिंह शुभकामनाएं..आने वाली १७ तारीख को भड़ास अपनी भड़ास के ५ साल पूरे कर लेगा। भड़ास और उसके संचालक यशवंत सिंह को इसके लिए बधाई और शुभ कामनाएं कि भड़ास अपनी यह यात्रा अनवरत बनाए रखे। चरैवति। चरैवति।
Rajan Singh so nice sir….
Ankit Srivastava baat sach hai lekin koi apne ghar me danka nhi dalwana pasand karta hai jitna ki dusro ki khabar chhap kar khud ko bada aadmi samjhta hai
Yashwant Singh शुक्रिया शंभू सर, रिकागनाइज करने और सम्मान देने के लिए… कमेंट करने वाले साथियों का भी आभार…
Sanjay Mishra यशवंत को शुभकामनाएं…
Sandeep Verma एक ऐसा नाम जिसका बैज अगर पत्रकार अपने सीने पर लगा ले तो उसकी नौकरी खतरे में पड़ जाए , पहले का तो पता नहीं मगर रिटायरमेंट के बाद ही सही यदि आप भड़ास की तारीफ़ करते है तो भड़ास को और भी ताकत मिलती है ..
वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ला के फेसबुक वॉल से.






