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भड़ास पर खबर प्रकाशित होने के बाद खिसियाया जीएम और क्रूर हुआ!

भड़ास पर उर्दू दैनिक आग और इन्किलाबी नजर के जीऍम का समाचार आने के बाद बौखलाए जीऍम हैदर ने ऑफिस में खूब गालियों की बौछार करी और सभी पत्रकारों को धमकाया कि कोई मेरा कुछ नही बिगाड़ सकता है. मैं जब चाहूँ तब किसी को भी बाहर का रास्ता दिखा सकता हूँ. कोई कुछ नहीं कर सकता है और सबके वेतन से अबकी एक-एक दो-दो दिन का वेतन काटा जाएगा, देखता हूँ कौन बोलता है.

भड़ास पर उर्दू दैनिक आग और इन्किलाबी नजर के जीऍम का समाचार आने के बाद बौखलाए जीऍम हैदर ने ऑफिस में खूब गालियों की बौछार करी और सभी पत्रकारों को धमकाया कि कोई मेरा कुछ नही बिगाड़ सकता है. मैं जब चाहूँ तब किसी को भी बाहर का रास्ता दिखा सकता हूँ. कोई कुछ नहीं कर सकता है और सबके वेतन से अबकी एक-एक दो-दो दिन का वेतन काटा जाएगा, देखता हूँ कौन बोलता है.

फिर उसके बाद वो गालियां देता हुआ सम्पादक के कमरे में घुसा और उनको भी धमकाया कि बहुत हो रही है भड़ासबाजी. तुम अपने दिल का दर्द भड़ास पर कह रहे हो, अबकी ऐसा दर्द दूंगा कि दर्द ही नहीं महसूस होगा और अब मीटिंग में तुमको भी आना होगा. बेचारे सम्पादक अब रोज सुबह साढ़े दस बजे मीटिंग में आ जाते हैं. यही नहीं उसने सजा के तौर पर सभी पत्रकारों के कंप्यूटर पर इन्टरनेट बंद कर दिया है और रात के समय हैदर व उसका एक आदमी जहीर सब पत्रकारों के कम्प्यूटर की छानबीन की. यहाँ तक के उसने सम्पादकों के कम्प्यूटर की भी तलाशी ले ली.

कई लोगों ने इसका विरोध भी किया, परन्तु हैदर की दबंगई की आगे कोई कुछ नही कर सका, अब जिस पत्रकार को कोई खबर निकालना हो तो वो हैदर से कहता है, फिर हैदर अपने कम्प्यूटर से इन्टरनेट खोल कर उस पत्रकार को काम करने देता है. यही नहीं हैदर का एक आदमी सब पत्रकारों पर निगाह रखे है. वो कोई न कोई बहाने से हर पत्रकार के पास जाता है और देखता है कि वो क्या कर रहा है.

अब सवाल ये उठता है कि संस्‍थान के मालिकान को हैदर की इन करतूतों का पता चलने के बावजूद भी हैदर के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नही की? क्या मालिकन की ही शह पर हैदर ये सब कर रहा है? अगर ऐसा है तो लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकारों को आगे आकर इसका विरोध करना चाहिए और हैदर की मान्यता तत्काल निरस्त होनी चाहिए. भड़ास के हम सभी पत्रकार आभारी रहेंगे कि उसने ये समाचार प्रकाशित करके हमारी बात को सभी मीडियाकर्मियों को हमारी असुविधा से अवगत कराया.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


मूल खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें –   'आग' और 'इन्‍कलाबी नजर' में पत्रकार हैं या बंधुआ मजदूर?

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