आदरणीय यशवंत जी, आपकी रिपोर्ट एक है मुझसे यानि नीरज पटेल से संबंधित. इसे पढ़कर मुझे अच्छा नहीं लगा. बल्कि दिल दुखा इसे पढ़कर. कम से कम मेरे बारे में लिखने से पहले मुझसे एक बार बात तो कर लेते. इससे खबर में जो तथ्यों की कमी हुई है वो न होती… मुझे खुशी है कि आपने मेरे बहाने कारपोरेट मीडिया की हकीकत दिखाने की कोशिश की लेकिन आपको नहीं लगता कि आपने इस लेख के द्वारा अपने इस भाई को मुसीबत में डाल दिया है….
दूसरी बात यह कि मैं सिस्टम में रहकर ही सिस्टम के खिलाफ अपनी क्षमता के हिसाब से लड़ाई लड़ रहा था लेकिन इस एक खबर ने मेरी इमेज पूरे मीडिया जगत में ऐसे क्रांतिकारी की बना दी जो लगता है सिस्टम विरोधी न होकर ब्राह्मणवादी संपादकों का विरोधी है…जबकि हकीकत ये है कि मेरी लड़ाई जबरन थोपे गए नियमों, चापलूसी, गुलामी और दलाली की संस्कृति के खात्मे और हां में हां मिलाने की प्रवृत्ति को लेकर है….
संपादक राजेन्द्र त्रिपाठी जी से मेरे वैचारिक मतभेद हो सकते हैं लेकिन सीधे तौर पर आपने उनको ब्राह्मणवादी बता दिया है, इससे मेरा मुद्दा ही दूसरी दिशा में डायर्वट हो गया है…. खबर से ऐसा लग रहा है कि मुझे इसलिए हटा दिया गया क्योंकि मैं पटेल (कुर्मी) जाति से हूं… आखिर मुझे शहीदों की श्रेणी में खड़ा करने से पहले मुझसे एक बार तो पूछ लिया होता…
खैर मेरी मुहिम को आपकी एक खबर बट्टा लगा सकती है… अब इसके बाद मेरे साथ क्या होगा, यह भी भड़ास पर छाप ही दीजिएगा…. मेरे स्पष्टीकरण का यह कतई मतलब नहीं कि मैं डर गया या किसी के दबाव में हूं बल्कि मैं इतना चाहता हूं कि सही बात सही ढंग से लोगों के बीच पहुंचे… अब किसी दूसरे के द्वारा उठाए गए कदम का खामियाजा मुझे भुगतना पड़ेगा….
नीरज पटेल
अमर उजाला
आगरा
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07417001113
मूल खबर:
एक हैं नीरज पटेल : वे संपादकों को खटकने लगे, संपादक उन्हें पटकने लगे






