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भारत लौटे पोंटी चड्ढा ने दी जोरदार पार्टी, लेकिन दारू नहीं पिलाई

: आयकर विभाग को तलाश पोंटी का साथ देने वाले ‘विभीषणों’ की : फरवरी 2012 के पहले हफ्ते में वाइन किंग पोंटी चड्ढा के दिल्ली, नोयडा, मुरादाबाद सहित 25 ठिकानों पर मारे गए आयकर विभाग के छापे में पोंटी तो नहीं फंसे लेकिन सीबीडीटी (आयकर विभाग की एक विंग) के कई अधिकारियों की गर्दन जरूर शूली पर लटक गई है। उनको मीडिया से लेकर ‘सरकार’ तक को जवाब देना मुश्किल हो रहा है। विभाग ‘घर’ के उस भेदी की तलाश जोर-शोर से कर रहा है जिसने अपने महकमें की जगह पोंटी के प्रति वफादारी निभाना ज्यादा मुफीद समझा, जिस कारण न केवल आयकर विभाग हाथ मलता रह गया बल्कि उसकी फजीहत भी चौतरफा हुई।

: आयकर विभाग को तलाश पोंटी का साथ देने वाले ‘विभीषणों’ की : फरवरी 2012 के पहले हफ्ते में वाइन किंग पोंटी चड्ढा के दिल्ली, नोयडा, मुरादाबाद सहित 25 ठिकानों पर मारे गए आयकर विभाग के छापे में पोंटी तो नहीं फंसे लेकिन सीबीडीटी (आयकर विभाग की एक विंग) के कई अधिकारियों की गर्दन जरूर शूली पर लटक गई है। उनको मीडिया से लेकर ‘सरकार’ तक को जवाब देना मुश्किल हो रहा है। विभाग ‘घर’ के उस भेदी की तलाश जोर-शोर से कर रहा है जिसने अपने महकमें की जगह पोंटी के प्रति वफादारी निभाना ज्यादा मुफीद समझा, जिस कारण न केवल आयकर विभाग हाथ मलता रह गया बल्कि उसकी फजीहत भी चौतरफा हुई।

विभागीय अधिकारियों को सत्ता के शीर्ष पर बैठे उन लोगों की भी बातें सुननी पड़ रही है जो इस छापे के माध्यम से मायावती को घेरना चाहते थे। विभाग के भीतर पोंटी के लिए काम करने वाले लोगों की फाइल जब तलाशी गई तो करीब आधा दर्जन ऐसे अधिकारियों/कर्मचारियों के नाम उभर कर सामने आए जिन पर अगले कुछ दिनों के भीतर कार्रवाई हो सकती है। छापे की खबर लीक होने की गुपचुप जांच चल रही है, इसके बाद प्रथम चरण में ही सीबीडीटी के एक बड़े अधिकारी के विरूद्ध कार्रवाई किए जाने की बात भी सामने आई थी, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। इससे इतर आयकर विभाग में चर्चा यह भी नहीं थम रही है कि ‘सत्ता’ के सामने विभागीय हनक ढीली पड़ गई। छापे का पूरा 'गेम’ ऊपर से ही ‘प्लान’ हुआ था और वहीं से ‘फ्लाप’ भी करा दिया गया।

बात विभागीय अधिकारियों की। आयकर विभाग के अधिकारी अभी भी आफ द रिकार्ड कहने से संकोच नहीं करते हैं कि यदि उनके महकमें में कोई विभीषण नहीं पैदा हुआ होता तो आयकर विभाग को अरबों रूपए का काला धन शराब माफिया के यहां से मिलने का अनुमान था। आयकर विभाग के छापे की खबर लीक हुई थी, इसकी पुष्टि इस बात से भी होती है कि छापे में उतनी भी दौलत नहीं मिली जितनी अमूमन एक व्यापारी के यहां मिल जाती है। इससे अधिक पैसा तो आयकर विभाग को सरकारी अधिकारियों, मंत्रियों, विधायकों के यहां से मिल जाता है, जबकि पोंटी ऐसे अधिकारियों मंत्रियों, विधायकों और नेताओं को जेब में लिए घूमता है।

पिछले दिनों एक चपरासी के घर से भी इससे अधिक पैसा और जेवरात बरामद हुए थे। हाल में ही एक विधायक के यहां छापे में 700 करोड़ रूपए मिले थे। वैसे आयकर विभाग अभी पोंटी के खिलाफ अपना अभियान पूरी नहीं होने की बात कह रहा है। गौरतलब हो, आयकर विभाग ने कथित कर अपवंचना के मामले में शराब व्यापारी पोंटी चड्ढा के परिसर¨की तलाशी के दौरान 11 करोड़ रुपए की नकदी, जेवरात और सावधि जमा के कागजात जब्त किये। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की प्रवक्ता अनुजा सारंगी ने बकायदा बयान देकर कहा ‘‘एक फरवरी के तलाशी अभियान के दौरान 2.03 करोड़ रुपए की नकदी, 5.18 करोड़ रुपए के जेवरात और 4.4 करोड़ रुपए के सावधि जमा और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए। 13 बैंक लाकर और अन्य परिसर सील करने के आदेश लंबित हैं। तलाशी अभी पूरी नहीं हुई है।

बात सीबीडीटी की कि जाए तो सीबीडीटी, आयकर विभाग का प्रशासनिक प्राधिकरण है और उसने इस खबर से इन्कार किया कि शराब और रीयल एस्टेट कारोबारी चड्ढा की इस तलाशी अभियान की जानकारी लीक कर दी गई थी। बयान में कहा गया कि मामले में जांच अभी चल रही है और मीडिया में इस संबंध में आई खबरों के पीछे कोई तथ्य नहीं है। आयकर विभाग ने चड्ढा के परिसरों में छापों की कार्रवाई एक फरवरी को शुरू की थी। इसके तहत उसके दिल्ली, उत्तर प्रदेश स्थित ठिकानों में तलाशी ली गई थी।

इन सब बातों से बेफिक्र पोंटी दुबई में अपनी बेटी हरलीन की शादी धूमधाम से निपटाने के बाद हिन्दुस्तान वापस भी आ गया। विवाह समारोह के पश्चात उसने दिल्ली के छतरपुर में स्थित चड्ढा फार्म हाउस में एक शानदार दावत दी। यहां पहुंचे मेहमानों ने उसकी हौसला अफजाई का काम किया। मेहमानों की लिस्ट में अकाली दल के सुखवीर सिंह बादल, कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला, समाजवादी नेता रामगोपाल यादव, बसपा के पूर्व सांसद अकबर अहमद डम्पी, उद्योगपति विजय माल्या जैसे तमाम नाम शामिल थे। यूपी में चुनावी मौसम नहीं होता तो पार्टी में कुछ और बड़े राजनैतिक चेहरे दिख सकते थे। पार्टी की खासियत की बात की जाए तो वाइन किंग ने किसी को भी एक पैग तक नहीं पिलाया। पार्टी से वाइन गायब थी।

अजय कुमारलखनऊ से वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार की रिपोर्ट. अजय 'माया' समेत कई मैग्जीनों-अखबारों में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं.  पोंटी चड्ढा की पूरी रामकहानी से आप परिचित न हों तो इस लिंक पर क्लिक करने के बाद सामने आए शीर्षकों पर एक-एक कर क्लिक कर पढ़ सकते हैं… भड़ास पर पोंटी

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