दैनिक भास्कर खुद को भारत का सबसे बड़ा समाचारपत्र समूह बताता है. आज भास्कर के ई-एडिशन पर गौर किया तो तीन अलग-अलग संस्करणों में एक ही समाचार को लेकर भ्रम पैदा हो गया. भास्कर के दिल्ली संस्करण में खबर है कि “महज 16 मिनट में उप्र बांटने का फैसला''. भोपाल संस्करण में इसी समाचार का शीर्षक है, “10 मिनट में पास हुआ उप्र के चार टुकड़े करने का प्रस्ताव”.
और अगर आप www.bhaskar.com देखेंगे तो इसी खबर पर शीर्षक है “25 सेकण्ड में मायावती ने पारित करा लिया यूपी के चार टुकड़े करने का प्रस्ताव”. भाई इतनी गडबडी तो खुद मायावती के दिमाग को भी खराब कर सकता है, या वाकई अलग-अलग शहरों में समय का आकलन इतना बदल जाता है.
एक पत्रकार के मेल पर आधारित.






