आज मुझे एक मित्र ने बताया कि राजधानी में एक राष्टीय न्यूज़ चैनल के लिए साक्षात्कार हुआ. इसमें कई नौजवान पत्रकार साथी शामिल हुए. उनका इस न्यूज़ चैनल से जुड़ने का कारण था कि इसमें एक ऐसे शख्स संपादक बने हैं जो हाल में ही एक चैनल में ठीकठाक एंकर हुआ करते थे. इन्हें देखकर लोगों ने सोचा कि इनसे जुड़कर कुछ नया सीखने को मिलेगा. यह चैनल एक बड़े अखबार समूह के पार्टनर के द्वारा लाया जा रहा है और ब्रांड नेम अखबार का नाम ही है.
इन्टरव्यू में पहला सवाल पूछा गया कि आप कहां से हैं तो नौजवान ने मासूमियत से बता दिया कि मैं धर्मनगरी से हूँ. साक्षात्कार लेने वाले महाशय ने तपाक से पूछ लिया कि आप हमें कितना कमा के दे सकते हैं, हम आपको आईडी देकर नेशनल चैनल का पत्रकार बना रहे है. बस, फिर क्या था, बेचारा आधे इंटरव्यू में ही उठ कर बाहर आ गया. जिस तेजी से नये नये चैनल बाजार में आ रहे हैं, उनके पीछे की मानसिकता क्या है, इस इंटरव्यू से समझ सकते हैं.
इन्टरव्यू में चैनल की माइक और आईडी को बेचने की बोली लगाई जाती रही. काशीपुर से इन्टरव्यू देने पहंचे सतनाम मेहता से भास्कर टीवी वालों ने पचास हजार रुपये देने पर चैनल की आईडी देने की बात कही. वहां कई अन्य लोगो से भी महीने भर में बीस से पचास हजार तक दिए जाने पर ही भास्कर टीवी में पत्रकार बनाने की बोली लगाई गई. देहरादून में भास्कर न्यूज ने लक्ष्मी सहाय एवं संजय पांडे को भास्कर की कमान सौंप दी है और इन्टरव्यू में भी उक्त दोनो लोगों की मौजूदगी रही है. पत्रकारिता के नाम पर चैनल की माइक आईडी बेचे जाने की खबरो को भास्कर न्यूज के एमडी राहुल मिततल ने सिरे से खारिज कर दिया है लेकिन जिन लोगो ने आरोप लगाए हैं उन्होंने इसकी लिखित शिकायत की है.
देहरादून से कई पत्रकारों द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित.






