भास्कर वालों के खानदान की एक पार्टनर हेमलता अग्रवाल भास्कर टीवी ला रही हैं. इसका जिम्मा उन्होंने राहुल मित्तल नामक युवा पत्रकार को दिया है जो कभी मेरठ में स्ट्रिंगर हुआ करता था. अचानक से मैनेजिंग डायरेक्टर बने राहुल मित्तल को चार-पांच करोड़ रुपये के भीतर चैनल लांच कर देने और चला देने का काम दिया गया है. इतने कम बजट में चैनल कैसे लांच हो सकता है और चल सकता है… सो, शुरुआत ही चैनल की आईडी बेचने से की गई ताकि रेवेन्यू आए. कई शहरों में इंटरव्यू किए गए और सेक्युरिटी मनी जमा करने व पैसे देकर आईडी लेने को इच्छुक लोगों को वरीयता दिया गया.
चैनल में वरिष्ठ पदों पर कुछ ऐसे बड़बोले लोगों को रख लिया गया है जो सेलरी तो भास्कर टीवी से उठा रहे हैं लेकिन दिन-रात खुद का चैनल लाने को तैयारी करते रहते हैं और इसी वास्ते निवेशक तलाशने के लिए जुटे रहते हैं. टीवी न्यूज इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का कहना है कि भास्कर टीवी के नाम पर जितने कम बजट में सब कुछ लाने, लगाने और कर जाने की तैयारी चल रही है वह असंभव सा है. इसलिए लो कॉस्ट चैनल को चलाने के लिए लो क्वालिटी को प्राथमिकता देना मजबूरी है.
उधर कुछ लोगों का कहना है कि भास्कर टीवी नाम पर भी विवाद शुरू हो चुका है. भास्कर ब्रांड नेम पर सिर्फ हेमलता अग्रवाल का नहीं बल्कि कई सारे अग्रवाल का अधिकार है. इसलिए कैसे किसी एक को भास्कर टीवी नाम से लाइसेंस मिल सकता है और इस नाम से कैसे कोई एक चैनल शुरू कर सकता है. जिस तरह दैनिक भास्कर प्रिंट वर्जन को लेकर भास्कर वालों में आपसी अदालती लड़ाई खूब चली है, उसी तरह भास्कर टीवी नाम के इस्तेमाल पर कोर्ट के जरिए कुछ लोग रोक लगवा सकते हैं.
कुछ अन्य का कहना है कि जो लोग दैनिक भास्कर नाम से यूपी में अखबार निकालने के अधिकार के बावजूद अच्छा अखबार नहीं निकाल पाए और न ही पूरे यूपी में दैनिक भास्कर अखबार का विस्तार कर पाए, वो लोग टीवी में कैसे बड़े खिलाड़ी बन सकते हैं. आखिर प्रोफेशनल एप्रोच भी तो कोई चीज है जिसके बल पर आप एक नहीं बल्कि कई प्रोडक्ट लांच व सफल कर सकते हैं. कुल मिलाकर भास्कर टीवी की राह में सिर मुड़ाते ओले पड़ने वाली स्थिति है और टीवी मीडिया इंडस्ट्री के अच्छे लोग इस चैनल से दूरी बनाने लगे हैं. (कानाफूसी)
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