Vineet Kumar : "बदले के लिए करना चाहता था मर्डर : सेक्स तक कर चुकी थी गर्लफ्रेंड, पर बाद में उड़ाने लगी मजाक".. (दैनिक भास्कर डॉट कॉम में प्रकाशित खबर) … हमारे कुछ साथी इस शीर्षक पर आपत्ति दर्ज करके इसका विरोध कर रहे हैं जो कि जायज है लेकिन भारतीय प्रेस परिषद् को चाहिए कि इसके संपादक/मॉडरेटर के आगे अन्तर्वासना डॉट कॉम की कोई एक स्टोरी सामने रखे और तब पूछे कि इस पोर्न वेबसाइट से किस स्तर पर आपकी वेबसाइट अलग है. और, अगर नहीं है तो आपको लोकतंत्र का चौथा खंभा चलाने की लाइसेंस क्यों दी जाए और आप पर क्यों न कानूनी कार्रवाई हो ? ये सवाल किसी भी हद तक जाकर सेल्फ रेगुलेशन और मीडिया एथिक्स में ले जाकर बात करने की नहीं है..ये बात पूरी तरह एक न्यूज वेबसाइट के भीतर पोर्न वेबसाइट चलाने की रिवन्यू मॉडल, मानसिकता, व्यवहार और ऑपरेशनल एटीट्यूड का है.
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Vineet Kumar : ऐसा नहीं है कि खबर के नाम पर पोर्न फ्लेवर पैदा करने की हरकत दैनिक भास्कर डॉट कॉम ने जेएनयू की घटना के बहाने पहली बार की है. इससे पहले 2 फरवरी 2010 को इस वेबसाइट ने ऐसी ही खबर की थी. वेबसाइट के मुताबिक मुताबिक खबर थी कि- एक बर्थडे पार्टी में जाते समय एमी ने ऐसी ड्रेस पहनी कि बस देखने वाले फटी आंखों से देखते रह गए। अखबार की साइट ने इसके लिए शीर्षक दिया- फिर छलका एमी का 'यौवन'। यौवन का सिंग्ल इन्वर्टेड कॉमा में रखा गया जिसे कि तस्वरे देखकर आप समझ जाएंगे कि ऐसा क्यों हैं? अखबार के लिहाज से ये शब्द एमी की अवस्था को बताने के लिए नहीं बल्कि उसके उभार को बताने के लिए है। आगे खुद साइट ही इसकी पुष्टि करता है- सेक्सी सिंगर एमी ने अपनी वार्ड रोब से ऐसी ड्रेस निकाली जिसने एक कंधे को नग्न ही छोड़ दिया था। अब इस ड्रेस से एमी के स्तन कैसे बाहर न छलक पड़ते तस्वीर देखकर ये अंदाज तो लगाया ही जा सकता है।
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Vineet Kumar : रियल एस्टेट, कोयले, ठेकेदारी के धंधे के बीच दैनिक भास्कर समूह का अखबार और वेबसाइट चलाना किस तरह की पत्रकारिता को बढ़ावा देना है, ये उसकी वेबसाइट पर रोजाना लगनेवाली तस्वीरों और गंभीर आपराधिक, संवेदनशील मानवीय पहलुओं से जुड़ी खबरों को को सरोगेट पोर्न खबर में तब्दील किए जाने के रुप में देखा जा सकता है. इस समूह का पत्रकारिता तो छोड़ ही दीजिए, धंधे के चमकाने के लिए खबर छापने के तरीके इस हद तक गिर चुका है कि जेएनयू की घटना को लेकर किसी भी स्तर पर संवेदनशील होने के बजाय दालमंडी के उस दल्ले की भाषा में पेश किया जिस पर सिर्फ शर्मसार होने और लानतें भेजने से काम नहीं चलेगा. इस वेबसाइट और दैनिक भास्कर पर कानूनी स्तर पर सख्ती से पेश आने की जरुरत है. कानून और मानवाधिकार के अलग-अलग संगठन इस मामले को गंभीरता से लें, इसके साथ ही ये भी जरुरी है कि दैनिक भास्कर डॉट कॉम जैसी वेबसाइट को सामाजिक स्तर पर बहिष्कार हो और इसके प्रतिरोध में लगातार सक्रिय हुआ जाए.
युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.






