दैनिक भास्कर समूह ने भले ही अपने कर्मियों को इनक्रीमेंट का लेटर दे दिया है लेकिन ढेर सारे कर्मचारियों के गले पर छंटनी की तलवार भी लटका रखा है. डीएनए अखबार और बिजनेस भास्कर अखबार के कई एडिशन बंद होने की सूचना से सैकड़ों पत्रकार और मीडियाकर्मी परेशान हैं. ये लोग अब नई नौकरी खोज रहे हैं. डीएनए और बिजनेस भास्कर के कुछ संस्करणों को बंद करने का फैसला किया है. इससे इन समाचार पत्रों में काम कर रहे सैकड़ों कर्मचारियों में निराशा का माहौल है.
बिजनेस भास्कर अखबार 2008 में शुरु हुआ था जिसके कई संस्करण दिल्ली में बैठकर निकाले जा रहे थे. यह अखबार व्यवसायिक तौर पर सफल नहीं हो पाया तो भास्कर प्रबंधन ने इस टीम के संपादकीय सहयोगियों को जयपुर कार्यालय में बैठाने का फैसला किया. नौकरी बचाने के चक्कर में कई कर्मचारियों ने जयपुर जाकर काम करने में ही भलाई समझी. लेकिन, अब अखबार बंद किए जाने की खबरों के चलते कर्मचारियों में भारी निराशा है.
डीएनए का इंदौर संस्करण 2011 में शुरु हुआ और इसे भी इस माह के अंत तक बंद किए जाने की खबर है. बाकी संस्करण बंद होगें या नहीं यह फैसला अभी प्रबंधन ने नहीं लिया है लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि ग्रुप में बड़े पैमान पर छंटनी की तैयारी हो चुकी है. इससे दैनिक भास्कर में काम कर रहे कर्मचारियों में निराशा है. एक तरफ भास्कर समूह कई नए संस्करण लाने की तैयारी कर रहा है तो दूसरी ओर समूह के कुछ प्रकाशनों को बंद करने की रणनीति कर्मचारी समझ नहीं पा रहे हैं.
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Vipul Rege
August 17, 2020 at 7:39 am
सैकड़ों पत्रकारों का हत्यारा नरेंद्र सिंह अकेला भास्कर से लात मारकर निकाला गया। इस नीच इंसान की कोई खबर भड़ास पर क्यो नही। नईदुनिया इन्दौर के संपादक आशीष व्यास का ट्रांसफर। सैकड़ों पत्रकारों का करियर तबादलों से बर्बाद किया। उसकी खबर क्यो नहीं। ये कैसी निष्पक्षता है भड़ास महोदय