Akhtar Khan : दो साल के संघर्ष के बाद उदयपुर शहर के श्रमजीवी पत्रकारों ने यूआईटी से काफी जद्दोजहद के बाद प्लाट के आवंटन लेटर आखिर आज ले ही लिए। देश के सबसे तेज बढ़ते कहे जाने वाले अखबार दैनिक भास्कर के उदयपुर एडिशन के दो सीनियर यूआईटी के और भू माफिया के दलाल पत्रकारों ने लाख कोशिश की कि दिन रात मेहनत करने वाले श्रमजीवी पत्रकारों को प्लाट नहीं मिले। उन दलालों ने अपने निजी आर्थिक फायदे के लिए वंचित रहे पत्रकारों को बरगला कर कोर्ट का नोटिस भी यूआईटी को दिलवाया, लेकिन मेरे कर्मठ और जुझारू श्रमजीवी पत्रकारों ने आखिर उनके मुंह पे तमाचा जड़ते हुए अपने हक के आवंटन लेटर यूआईटी से ले ही लिए।
अगर मेरी पोस्ट दैनिक भास्कर के संपादक व अन्य लोग पढ़ रहे हैं तो ऐसे भू माफिया के दलाल पत्रकारों का विरोध करो और उनका बहिष्कार करो क्यों कि ये ही वे लोग हैं जिन्होंने पत्रकारिता को धंधा बना रखा है। और अपने निजी फायदे में ये अन्य पत्रकारों की तो दूर की बात है अपने ही स्टाफ के हक मारने वाले नमकहराम बने हुए हैं। इस उपलब्धि के लिए सभी श्रमजीवी पत्रकारों को बधाई और उनकी हिम्मत की दाद कि उन्होंने अपने हक की ज़मीन दलालों के हलक में हाथ दाल कर निकाल ली।
इसी दौरान कल यूआईटी में जब अधिकारी पत्रकारों को आवंटन जारी नहीं कर रहे थे, तब कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष श्रीमती नीलिमा सुखाडिया यूआईटी आईं और अधिकारियों से सवाल जवाब किया तो अधिकारियों ने बताया कि दैनिक भास्कर के दो सीनियर पत्रकार श्री सैयद हबीब और श्री देवेन्द्र शर्मा नहीं चाहते हैं कि पत्रकारों को प्लाट आवंटित हो। तो श्रीमती नीलिमा सुखाडिया ने कहा कि कौन वो डेढ़ फुटिए जो टेबल के नीचे से पैसे लेते हैं। फिर नीलिमा सुखाडिया ने सुधीर अग्रवाल को फोन किया था, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। कुल मिलाकर दैनिक भास्कर के ब्रांड इमेज उदयपुर के पत्रकारों के बीच में बहुत खराब हुई है।
पत्रकार अख्तर खान के एफबी वॉल से साभार.






