भास्कर, बठिंडा ने इस साल होली पर होलिका का इतिहास ही बदल डाला. बठिंडा में बैठे अधकचरे ज्ञान वालों ने जो नया इतिहास पंजाब के लोगों को बताया है उसके मुताबिक़ पुजारी पंडित रवि कुमार ने बताया कि हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका की परीक्षा लेने के लिए उसे आग में बैठा दिया था, मगर आग ठंडी पड़ गयी और होलिका बच गयी थी. इसीलिए इस दिन लोगों द्वारा होली कुंड को सांयकाल अग्नि को समर्पित कर दिया जाता है.
यह नया इतिहास बठिंडा से छपने वाले मोगा फरीदकोट भास्कर के प्रथम पेज पर छापा गया है. कई लोगों ने इसे चेक किया होगा पर किसी की भी नज़र इतिहास से हो रहे इतने बड़े मज़ाक पर क्यों नहीं पड़ी यह मोगा समेत बठिंडा में चर्चा का विषय बना हुआ है. वैसे इतिहास के मुताबिक़ हिरणकश्यप की बहन होलिका, जिसे आग से नहीं जलने का आशीर्वाद था, अपने भतीजे प्रहलाद को लेकर अग्निकुंड में बैठी थी. परन्तु आग में होलिका जल गयी थी, जबकि प्रहलाद बच गए थे. इसलिए बुराई को प्रतीक स्वरुप जलाने के लिए होलिका जलाई जाती है. मगर धन्य हैं भास्कर वाले. आम लोगों की जानकारियां भी खराब हो रही है.







