Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

भुट्टा वाला

Yashwant Singh : भुट्टे के दिन खत्म. मेरे मोहल्ले के मोड़ पर रोज भुट्टे भून कर खिलाने वाला भुट्टा वाला अब अपना ठेला नहीं लगाता. उसके बगले में मोसम्मी जूस बेचने वाला बताता है कि भुट्टे के दिन खत्म हो गए तो वो भुट्टा वाला अब रिक्शा वाला बन गया होगा. मै नासमझ सा दिखा तो उसने समझाया. वो भुट्टा वाला दिन में रिक्शा चलाता था और शाम चार बजे के आसपास रिक्शा खड़ा कर भुट्टा वाला ठेला लगा देता था. अब भुट्टे नहीं आ रहे होंगे इसलिए वो फुल टाइम रिक्शा चला रहा होगा.

Yashwant Singh : भुट्टे के दिन खत्म. मेरे मोहल्ले के मोड़ पर रोज भुट्टे भून कर खिलाने वाला भुट्टा वाला अब अपना ठेला नहीं लगाता. उसके बगले में मोसम्मी जूस बेचने वाला बताता है कि भुट्टे के दिन खत्म हो गए तो वो भुट्टा वाला अब रिक्शा वाला बन गया होगा. मै नासमझ सा दिखा तो उसने समझाया. वो भुट्टा वाला दिन में रिक्शा चलाता था और शाम चार बजे के आसपास रिक्शा खड़ा कर भुट्टा वाला ठेला लगा देता था. अब भुट्टे नहीं आ रहे होंगे इसलिए वो फुल टाइम रिक्शा चला रहा होगा.

भुट्टे वाले से मैं ठीक से परिचित हो गया था. वो बिहार का निवासी… हर माह अपने घर पर पांच हजार रुपये का मनीआर्डर भेजता… रिक्शा चलाकर महीने में पांच हजार रुपये कोई मनीआर्डर भेज दे.. यह आश्चर्य लगता.. लेकिन वह भेज सकता था क्योंकि उसका अपना खुद का खर्च कुछ न के बराबर है… एक ही फटा गंदा कपड़ा रोज पहनता… कई लोगों के साथ मिल कर झुग्गी में रहता सो बना बनाया घर पर ही खाने को मिल जाता… इसके अलावा कोई खर्च नहीं.. जो मिलता, वो सब बचता, और वो सब गांव जाता, पत्नी-बच्चों के पास..

ढेरों कहानियां उससे जानता, पूछता.. और यह सब करते हुए रोज चार-पांच भुट्टे खड़े खड़े खा जाता… हर रोज उसे पचास या साठ रुपये के नोट देता.. प्रति भुना भुट्टा दस रुपये के मार्केट रेट के आधार पर… वो बेहद नरम मुलायम और अच्छे भुट्टे मुझे खिलाता… वो खुश था कि एक बंधा बंधाया ग्राहक उसके पास है.. मैं खुश कि मेरा कुछ वक्त किसी अच्छे आदमी के साथ बोल-बतिया, सुथ-दुख बांटकर बीता.. कोई मुझसे अगर शाम के वक्त मिलने आता तो उसे भी वहीं भुट्टे के ठेले के बगल में खड़ा कर भुट्टे खिलाता और मीटिंग निपटा लेता..

अब वो नहीं दिखता है तो हर शाम को लगता है कि कुछ मिस कर रहा हूं…

क्या करूं, मेरी दुनिया के लोग ये सब हैं.. भुट्टे वाला, आइसक्रीम वाला, जूस वाला, सब्जी वाला, रिक्शा वाला, वाइन शाप का सेल्समैन, चिकन-मटन की दुकान का कारीगर, मोहल्ले का चौकीदार, कार साफ करने वाला, अखबार बांटने वाला, बेरोजगार मीडिया वाला…

अपन छोटे लोग अपने ही जैसे छोटे मोटे लोगों से हिल-मिल कर और उनके छोटे-मोटे सुखों-दुखों को बोल-बतिया कर सुखी-दुखी रहते हैं…

ज़िंदगी में जब ख्वाहिशें, इच्छाएं, महत्वाकांक्षाएं दिन प्रतिदिन छोटी यानि न्यूनतम होती जा रही हों और कई बार शून्य की सुई को छूने लगती हों तो उनसे क्या मिलिए उनसे क्या कहिए जिनके पास वक्त नहीं, बोल नहीं, संवेदना नहीं, सहजता नहीं, स्थिरता नहीं, सच नहीं, सुंदरता नहीं…

हाशिए वाला, असफल, गरीब, गंदा, बेचारा बंदा माने जाने वाले ज्यादा अच्छे लगते हैं.. क्योंकि इनके पास जीवन है, इनके पास सहजता है, इनके पास सरलता है, इनके पास संघर्ष है, इनके पास जिंदगी है, इनके पास मिट्टी है, इनके पास देने के लिए बड़ा सा दिल और स्नेह है…

कभी आप भी इन रिक्शे वालों, भुट्टे वालों, सब्जी वालों, जूस वालों से दोस्ती गांठ कर देखिए…

नोट : दो-चार रुपये कम या ज्यादा होने पर इन ठेला धारियों से लड़ने-भिड़ने व गरियाने को आमादा रहने वाले बड़े लोगों से अनुरोध है कि वे इस पोस्ट को इग्नोर करें.

लेखक यशवंत सिंह भड़ास4मीडिया के एडिटर हैं. उनका यह लिखा उनके फेसबुक वॉल से लिया गया है.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...