आदरणीय, यशवंत जी भाईसाब को नमस्कार। मैंने जिस दिन आपको पुलिस पब्लिक प्रेस के बारे में लेख भेजा था। उसके एक दिन पूर्व ही मुझे आपके न्यूज पोर्टल भड़ास4मीडिया की जानकारी मिली थी। बताया गया था कि कोई भी पत्रकार अपनी व्यथा इस पोर्टल के माध्यम से सार्वजनिक कर सकता है। रातभर में कई कागज फाड़ने के बावजूद पुलिस पब्लिक प्रेस के संबंध में लेख पूरा हो ही गया। मैंने बिना आपसे बात किए वो लेख आपकों ईमेल द्वारा भेज दिया। खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा जब लेख भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित हुआ।
मुझे पता है कि इसकी अदृश्य प्रतिक्रिया क्या हुई होगी। आपकी जिंदादिली व खबर के प्रति न्याय की भावना को बारम्बार सलाम। मुझे जानकारी मिली है कि पवन भूत आपका करीबी है या जाणिता (आप उसे जानते है) है। बावजूद आपने मुझ अंजान युवक के लेख को प्रकाशित कर दिया। वाकई आपको धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए शब्द नहीं है मेरे पास।
मैं गरीब परिवार से हूं व अनुसूचित जाति से भी। हाशिए पर स्थापित जाति का होने के बावजूद कई ठोकरें खाने के बाद दैनिक भास्कर का स्ट्रिंगर रहा। उसके बाद क्षेत्र में ठीक-ठाक पहचान बन गई। लेकिन पवन भूत रूपी काले नाग ने आकर मेरी हंसती-खेलती जिन्दगी को डस लिया। किरण बेदी के नाम से प्रभावित होकर जुड़ गया और तीन माह तक काम किया। इस दौरान पता चला पवन भूत द्वारा तो पत्रिका कभी कभार ही छपवाई जाती है वो भी नाम मात्र की। तब मैंने एक दिन पवन भूत से कहा कि ‘सर लोग पत्रिका की मांग कर रहे हैं’। पवन भूत का जवाब आया कि ‘आम खाओ, गुठलिया मत गिनो’। मैं भौचक्का रह गया। विरोध किया, और स्वयं ही नौकरी छोड़ दी। लेकिन मुझे तीन माह की सेलरी नहीं मिली। 15 दिन के अतिरिक्त फास्ट ट्राइल कार्य का पैसा भी नहीं मिला। पवन भूत की गालियां व धमकियां सुनने को मिली वो अलग।
भाईसाब, पुलिस पब्लिक प्रेस के पवन कुमार भूत ने मेरी जिन्दगी को पांच साल पीछे धकेले दिया और पुलिस पब्लिक प्रेस की वजह से 25 वर्ष की उम्र में मैंने जो इज्जत बनाई थी, ईमानदारी पर चलकर जो छवि लोगों में बनाई थी वह धूमिल हो गई। मैंने पुलिस पब्लिक प्रेस को छोड़ने के साथ ही गांव भी छोड़ दिया क्योंकि जिन लोगों को मैंने सदस्य बनाया उन्हें पवन भूत द्वारा पत्रिका नहीं भेजी गई। वैसे मेरे अलावा अन्य रिपोर्टरों द्वारा बनाए गए सदस्यों को भी नहीं भेजी गई। लेकिन आज उन लोगों के सामने अपने आप को लज्जित महसूस करता हूं जिनको मैंने बतौर सदस्य पुलिस पब्लिक प्रेस से जोड़ा।
जब पुलिस पब्लिक प्रेस को छोड़ा तब ही सोच लिया कि पवन भूत के खिलाफ कार्यवाही तो करवानी है। मैं अपने स्तर पर प्रयास कर रहा हूं जिसमें आप जैसे लोगों का सहयोग मिल रहा है। मैं आपको पवन भूत द्वारा लिखी गई प्रतिक्रिया के खिलाफ पुनः प्रतिक्रिया भेज रहा हूं। पूरी रात जागकर प्रतिक्रिया लिखी व 4 बजे आपके लिए ये पत्र। 4.15 के ब्रह्म मुहुर्त में आपको ईमेल कर रहा हूं।
कृपया प्रकाशित करावें।
अति कृपा होगी, धन्यवाद।
लखन सालवी
+91 9828081636
जिस लिखे को प्रकाशित करने की बात लखन सालवी ने की है, उसे यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं…
लखन सालवी ने पवन भूत की 45 मिनट की बातचीत भी रिकार्ड की है, जिसे आप यहां सुन सकते हैं-






