: कानाफूसी : एक कहावत है कि चूहे को अगर हल्दी की गांठ मिल जाए तो वो खुद को पंसारी समझ बैठता है। कहावत का मतलब है कि थोड़ी हैसियत मिलने पर ही कई लोग अपने आप को मालिक मान लेते हैं। खासकर नए-नए पत्रकार इस बीमारी के जल्दी शिकार बन जाते हैं। जगह-जगह अपनी धौंस जमाते हैं कि मैं रिपोर्टर हूं। वक्त के साथ धीरे-धीरे औकात समझ आने लगती है। जिनको नहीं आती उनका जूलुस निकलता ही निकलता है।
एसटीवी ग्रुप के हरियाणा न्यूज के अति उत्साही एक रिपोर्टर के साथ भी ऐसा ही हुआ। भाईसाहब पीसीआर में जाकर पैनल प्रोडयूसर से अपना प्रोमो चलाने की जिद करन लगे। ना चलाने पर कहा कि तेरी औकात क्या है। तू जानता नहीं कि मैं कौन हूं। यहां तक तो ठीक था लेकिन जैसे ही भोलेपन में भाईसाहब ने गाली देनी शुरु की। पैनल प्रोड्यसर के सब्र का बांध टूट गया। पत्रकार महोदय को दो थप्पड़ रसीद कर दिए, कमीज फाड़कर भरे चैनल में नंगा कर दिया। पिटने के बाद भाईसाहब को अपनी औकात पता चल गई। पैनल प्रोड्यसर का तो कुछ नहीं हुआ सुनने में आया है कि चैनल प्रबंधन भाईसाहब के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के मूड में है।
दरअसल रिपोर्टर भाई साहब हरियाणा न्यूज के युवा और अति उत्साही पत्रकार हैं। मुश्किल से दो साल का भी करिअर नहीं हुआ है लेकिन खुद को निखिल नाज या समीप राजगुरु से कम नहीं समझते। ऑफिस में अक्सर लड़कियों के सामने लंबी लंबी छोड़ना उनकी आदत बन चुकी है। कई बार स्क्रीन पर अति उत्साह दिखाकर उपहास का पात्र बन चुके हैं वो अलग बात है कि उन्हें इस बात का अहसास नहीं होता। खबरों में अति उत्साह दिखाने में तो वो सीखने को तैयार नहीं क्योंकि वो अपने आपको मास्टर समझते हैं, लेकिन उम्मीद करते हैं कि खुद खबर बन जाने के बाद हो सकता हैं कि इनके भोलेपन में कुछ कमी आ जाए.






