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मंत्री जी ने पत्रकारों के लिए अलग-अलग बजट बना रखा है

उत्तर प्रदेश का एक मंत्री ऐसा है जिसके पीछे पूरी प्रदेश सहित उसके गृह जनपद अमेठी की मीडिया घूमती है, आखिर घूमे भी क्यूं ना जब मंत्री जी चैनल और समाचार पत्र में खबर छापने और न छापने पर मीडिया कर्मियों को पैसे बांटते है. दरअसल ये मंत्री है गायत्री प्रसाद प्रजापति, जिन्हें सरकार में भूतत्व एव खनिजकर्म राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है. विधायक से मंत्री बनने में जितनी मेहनत गायत्री प्रसाद ने की उससे कम मीडिया वालों ने भी नहीं की हाल ये रहा कि पीपली लाइव फ़िल्म की तरह अमेठी की इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया गायत्री प्रजापति के पीछे पीछे चलने लगी. मंत्री जी से पैसा लेने और उनका ख़ास बनने के चक्कर में कई बार तो प्रदेश मुख्यालय और मंत्री के गृह जनपद अमेठी में प्रिंट और इलक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों के बीच कहा सुनी भी हो चुकी है.
उत्तर प्रदेश का एक मंत्री ऐसा है जिसके पीछे पूरी प्रदेश सहित उसके गृह जनपद अमेठी की मीडिया घूमती है, आखिर घूमे भी क्यूं ना जब मंत्री जी चैनल और समाचार पत्र में खबर छापने और न छापने पर मीडिया कर्मियों को पैसे बांटते है. दरअसल ये मंत्री है गायत्री प्रसाद प्रजापति, जिन्हें सरकार में भूतत्व एव खनिजकर्म राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है. विधायक से मंत्री बनने में जितनी मेहनत गायत्री प्रसाद ने की उससे कम मीडिया वालों ने भी नहीं की हाल ये रहा कि पीपली लाइव फ़िल्म की तरह अमेठी की इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया गायत्री प्रजापति के पीछे पीछे चलने लगी. मंत्री जी से पैसा लेने और उनका ख़ास बनने के चक्कर में कई बार तो प्रदेश मुख्यालय और मंत्री के गृह जनपद अमेठी में प्रिंट और इलक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों के बीच कहा सुनी भी हो चुकी है.
 
मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति ने भी, किसी रेस्टोरेंट में रखी खाने की सूची में जैसे खाने का मूल्य निर्धारित होता है, उसी प्रकार प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों का भी मूल्य निश्चित कर दिया है इन सब में ख़ास बात ये है कि मंत्री जी कि आवभगत में कई बड़े चैनलों के लोग मंत्री के अपने क्षेत्र में आने का इन्तजार करते हैं. मंत्री ने इन सभी पत्रकारों के लिए विशेष मूल्य सूची बनाई है जिसमें लखनऊ के मीडिया कर्मियों को पांच-पांच हजार रूपए और अमेठी के इलेक्ट्रानिक मीडिया के लोगों को तीन-तीन हजार और प्रिंट मीडिया के सभी पत्रकारों को डेढ़ डेढ़ हजार रूपए बांटने का एक अलग बजट बना रखा है. 
 
अब जब पत्रकारों की जेबें गरम रहती हैं तो मंत्री जी गलत काम भी करें तो ठीक है क्योंकि किश्त तो बराबर मिल ही रही है अगर खबर छापी तो किश्त से भी हाथ न धोना पड़ जाए इस बात का भी डर रहता है. वैसे मंत्री जी अब खुले मंच से ये साफ़ कहते दिखाई देते हैं कि मुझे मीडिया ने विधायक से मंत्री बना दिया. हम इनका ध्यान रखते हैं तभी ये हमारा ध्यान रखते हैं. और तो और मंत्री का ये भी कहना होता है कि प्रचार प्रसार होने से इंसान का महत्व होता है. लगता है तभी मंत्री जी को प्रचार प्रसार से इतना प्रेम है.
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