: मीडिया में यह मंदी का वक्त, पत्रकार बंधुओं संभल जाओ : अपनी आय नकदी के रुप में न संभाली तो संकट का सामना मुश्किल : मंदी की चपेट में आए पत्रकारों को भड़ास की नेक सलाह से मैं भी सहमत : मीडिया पहले अपने बारे में अमूमन नहीं लिखता है। दुनिया को शोषण और अत्याचार की कहानी बताएगा अपने घर और पड़ोस के मीडिया पर चुप्पी साध लेता है। हमें शुक्रगुजार होना चाहिए कि वेबसाइटों, ब्लागों, सोशल मीडिया का जिनके जरिए पत्रकारों और मीडिया जगत में हो रहे हलचल की जानकारी लगातार मिलती रहती है। मीडिया सेक्टर की खबरें निकालना कोल्हू में तेल निकालने के समान है। इससे पत्रकार कितने सशक्त होंगे इसका आकलन कुछ समय बाद ही हो सकेगा।
आज शुक्रवार को भड़ास 4 मीडिया पर इसके संपादक यशवंत सिंह की एक रिपोर्ट पर मेरी नजर पड़ी-पाई-पाई बचाकर रखें मीडियाकर्मी क्योंकि मंदी है छाई, छंटनी शुरू हो गई भाई। पूरा पढ़ा। बहुत अच्छा लगा। यशवंत ने नेक सलाह दी है कि मंदी का समय है पत्रकार बंधुओं संभलकर खर्च करो। ऐसा न हो कि पैसे के लिए आगे चलकर लाले पड़ जाए। उन्होंने कुछ समय के लिए कुछ भी काम करने को कहा है ताकि परिवार का खर्चा चल सके।
इस कड़ी में मैं एक बात जोड़ना चाहूंगा कि अगर पत्रकार की पत्नी भी कुछ अर्जित करती रहे तो फिर बड़ा संकट नहीं आएगा। कल गुरुवार को उदयन शर्मा की याद में हुए एक सेमिनार में राजदीप सरदेसाई ने भी टीवी चैनलों में मंदी की आहट का इशारा किया था। इस मसले पर आगे भी मैं कुछ इनपुट देना चाहूंगा। फिलहाल यहीं तक।
लेखक राय तपन भारती दिल्ली में आर्थिक मामलों के पत्रकार हैं. संपर्क- 09899075196
ये है भड़ास की नेक सलाह..
पाई-पाई बचाकर रखें मीडियाकर्मी क्योंकि मंदी है छाई, छंटनी शुरू हो गई भाई






