नई दिल्ली। मुंबई में आतंकवादी हमले के दोषी पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब की मौत की सजा बरकरार रखने वाले तथा पत्रकारों के लिए मजीठिया वेज बोर्ड की अधूरी सुनवाई करने वाले सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश आफताब आलम शुक्रवार को रिटायर हो गए। न्यायमूर्ति आफताब आलम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने ही हाल में कैंसर की दवा 'ग्लावेक' के पेटेंट के लिए स्विस फार्मा कंपनी नोवार्टिस एजी की याचिका खारिज करके भारत में ही इस दवा के उत्पादन का मार्ग प्रशस्त कर दिया जिसे कैंसर के लाखों मरीज इसे खरीदने की स्थिति में होंगे।
जस्टिस आफताब आलम पत्रकारों के लिए लागू किए जाने वाले मजीठिया वेज बोर्ड की सुनवाई वाले दो सदस्यीय खंडपीठ के हिस्सा भी थे, परन्तु वे इस मामले की पूरी सुनवाई नहीं कर पाए। आफताब आलम के दूसरे मामलों की सुनवाई में उलझ जाने के चलते मजीठिया वेज बोर्ड पर आखिरी फैसला नहीं सुनाया जा सका। अब यह मामला नए खंड पीठ में सुना जाएगा, जिसकी तारीख 9 अप्रैल तय की गई है।
प्रधान न्यायाधीश एसएच कपाड़िया के सेवानिवृत्त होने के बाद न्यायमूर्ति आफताब आलम ने वन एवं वन संपदा के संरक्षण से संबंधित विशेष खंडपीठ की अध्यक्षता की और बृहस्पतिवार को ओडिशा तथा कर्नाटक में खनन गतिविधियों पर महत्वपूर्ण फैसले सुनाए। न्यायमूर्ति आलम की सदस्यता वाली खंडपीठ ने ही बहुचर्चित सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ कांड और इस घटना के चश्मदीद तुलसीराम प्रजापति की हत्या के मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। इन दोनों ही मामलों में भाजपा के महासचिव और गुजरात के पूर्व मंत्री अमित शाह भी अभियुक्त हैं।
गुजरात दंगों से संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान वह विवादों में भी आए। सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के पूर्व सहायक रईस खां पठान ने न्यायालय में एक अर्जी दायर कर न्यायमूर्ति आलम से इन मामलों से हटने का अनुरोध किया। इस संबंध में रईस खां ने लंदन में आयोजित एक कार्यक्र म में न्यायमूर्ति आलम के एक भाषण को आधार बनाया जिससे उनकी पुत्री जुड़ी थी। जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के कार्यवाहक न्यायमूर्ति आलम को नवम्बर 2007 में पदोन्नति देकर सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया था।






