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मजीठिया वेज बोर्ड न देने के लिए ‘लोकमत’ वाले अपने परमानेंट इंप्लाइज से जबरन इस्तीफा ले रहे (देखें पत्र)

'लोकमत' का एक खत यहां प्रकाशित किया जा रहा है. इस पत्र की भाषा मराठी है क्योंकि मसला भी महाराष्ट्र का है. लोकमत महाराष्ट्र का मराठी अखबार है. इसका प्रबंधन मराठी के अलावा हिंदी अखबार लोकमत समाचार समेत अंग्रेजी अखबार भी प्रकाशित करता है. इन दिनों लोकमत ग्रुप में हड़कंप मचा हुआ है, खासकर उनमें जो परमानेंट इंप्लाई हैं. मजीठिया वेतन आयोग के हिसाब से बढ़ा हुआ पैसा कर्मचारियों को न देना पड़े, इसके वास्ते लोकमत प्रशासन ने अखबार कर्मियों से इस्तीफा लेकर उन्हें ठेके पर रखना शुरू किया है. जो लोग इस्तीफा नहीं दे रहे, उन्हें सताया जा रहा है.

'लोकमत' का एक खत यहां प्रकाशित किया जा रहा है. इस पत्र की भाषा मराठी है क्योंकि मसला भी महाराष्ट्र का है. लोकमत महाराष्ट्र का मराठी अखबार है. इसका प्रबंधन मराठी के अलावा हिंदी अखबार लोकमत समाचार समेत अंग्रेजी अखबार भी प्रकाशित करता है. इन दिनों लोकमत ग्रुप में हड़कंप मचा हुआ है, खासकर उनमें जो परमानेंट इंप्लाई हैं. मजीठिया वेतन आयोग के हिसाब से बढ़ा हुआ पैसा कर्मचारियों को न देना पड़े, इसके वास्ते लोकमत प्रशासन ने अखबार कर्मियों से इस्तीफा लेकर उन्हें ठेके पर रखना शुरू किया है. जो लोग इस्तीफा नहीं दे रहे, उन्हें सताया जा रहा है.

कई पत्रकारों को तो पहले ही परमानेंट से इस्तीफा दिलाकर सीटीसी यानि ठेके पर रख दिया गया है. अब बचे हैं गैर-पत्रकार कर्मचारी जिसमें मशीन, प्रोडक्शन, एड, सर्कुलेशन के बहुत से बंदे हैं. ये परमानेंट एम्प्लायी हैं जिनसे रेजिगनेशन मांगा जा रहा है. इन लोगों को ठेके पर नियुक्त किया जाएगा. ऐसे लोगों को अब धमकाया जा रहा है. लोकमत ने अकोला से इस प्रयोग की शुरुआत की है. अगर यह सफल रहता है तो पूरे महाराष्ट्र में चलाया जाएगा. अकेले अकोला में 125 लोग मजीठीया के लिए पात्र हैं. उनमें से 75 लोगों से इस्तीफा मांगा गया है.

मालिक दर्डा के दाहिने हाथ माने जाने वाले एचआर हेड बालाजी मुले जो खुद को एम. बालाजी कहलवाते हैं, इन दिनों अकोला में डेरा डाले हुए हैं. पिछले हफ्ते भर से जारी संघर्ष में अभी तक सिर्फ दो लोगों ने इस्तीफे दिए हैं. इन 125 लोगों ने अपर लेबर कमिश्नर, अकोला एवं लोकमत प्रबंधन को एक पत्र लिखकर अनुरोध दिया है कि उन्हें प्रताड़ित परेशान न किया जाए. ज्ञात हो कि इन दिनों महाराष्ट्र में लोकमत एक मात्र ऐसा मीडिया ग्रुप है जहां वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन कार्यरत है. 'लोकमत' में 'लोकमत श्रमिक कामगार संघटना' कार्यरत है.

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