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मजीठिया से बचने के लिए हिंदुस्तान ने अपने मीडियाकर्मियों को नई कंपनी में डाला

ये पूंजीपति पैसे के इतने भूखे प्यासे रहते हैं कि इसके लिए वे नियम, कानून, शासन, प्रशासन तक को धता बताते रहते हैं. मीडियाकर्मियों के लिए मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हिंदुस्तान अखबार की मालकिन शोभना भरतिया ने पैसे बचाने के लिए गजब की तकनीक निकाली. इन्होंने अपने मैनेजरों को कह दिया कि वे मीडियाकर्मियों को एक नई कंपनी में डाल दें और कंपनी ऐसी बनाएं जिससे लगे कि ये मीडिया कंपनी है और मजीठिया के दायरे में भी न आती हो.

ये पूंजीपति पैसे के इतने भूखे प्यासे रहते हैं कि इसके लिए वे नियम, कानून, शासन, प्रशासन तक को धता बताते रहते हैं. मीडियाकर्मियों के लिए मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हिंदुस्तान अखबार की मालकिन शोभना भरतिया ने पैसे बचाने के लिए गजब की तकनीक निकाली. इन्होंने अपने मैनेजरों को कह दिया कि वे मीडियाकर्मियों को एक नई कंपनी में डाल दें और कंपनी ऐसी बनाएं जिससे लगे कि ये मीडिया कंपनी है और मजीठिया के दायरे में भी न आती हो.

सो वेब डिवीजन की एक कंपनी बनाकर प्रिंट के उन लोगों को इसमें सेवारत दिखा दिया गया जो मजीठिया के हकदार थे. यूपी, बिहार, झारखंड समेत कई प्रदेशों में हिंदुस्तान मैनेजमेंट ने ऐसा किया है. इसको लेकर मीडियाकर्मियों में खासा रोष है लेकिन नौकरी की मजबूरी के कारण कोई आवाज खुलकर नहीं उठा रहा. मजीठिया वेज बोर्ड प्रिंट मीडिया के लिए है, वेब मीडिया के लिए नहीं. इसलिए वेब डिवीजन में प्रिंट के मीडियाकर्मियों को डाल देने से हिंदुस्तान प्रबंधन मजीठिया के हिसाब से सेलरी, भत्ते, एरियर आदि देने से बच गया और इस प्रकार अरबों रुपये हड़प लिए.

इससे पहले जब मजीठिया का मामला अखबार मालिकों ने सुप्रीम कोर्ट में डालकर लटका रखा था तब हिंदुस्तान की मालकिन शोभना भरतिया ने अपने प्रधान संपादक शशि शेखर और प्रधान मैनेजरों के माध्यम से सैकड़ों परमानेंट मीडियाकर्मियों को उत्पीड़ित किया ताकि ये लोग नौकरी छोड़ दें या फिर कांट्रैक्ट पर आ जाए जिससे मजीठिया के हिसाब से बढ़ा हुआ पैसा देने से बचा जा सके. उस उत्पीड़नात्मक कार्यवाही के जरिए हिंदुस्तान के सैकड़ों लोगों को दूरदराज ट्रांसफर कर तरह तरह से प्रताड़ित किया गया. कई शोषित उत्पीड़ित लोगों ने श्रम विभाग में वाद दायर कर रखा है लेकिन सब जानते हैं कि इन बड़े बड़े दैत्याकार मीडिया घरानों की ताकत के आगे शासन प्रशासन की ताकत के कोई मायने नहीं. बड़े लोग अपने बड़े हाथों पंजों से सब कुछ मैनेज कर लेते हैं और आम मीडियाकर्मी न्याय व कानून का झुनझुना बजाते हुए मुंह ताकता रह जाता है. 

इस प्रकरण को लेकर भड़ास के पास एक मीडियाकर्मी ने मेल भेजकर बताया है कि… ''Namaskar yashwant jee, hindustan mei main kaam karta hun. aapse gujarish hai ki tathyon ki padtal kar khabar prakashit kare. yahan desk aur reporting k sathiyon ko dhokhe me rakh kar kai cost center me divide kar diya gaya hai. Wage board ke dayre me ve naa aaye isliye internet division me reporter, sub editors ko daal diya gya hai.. Kuch log newspaper division me hain.''

इस सूचना से जाहिर है कि उन लोगों को जो कांट्रैक्ट पर हैं और मजीठिया के दायरे में हैं, इंटरनेट डिवीजन में डाल दिया गया है. कुछेक बचे हुए परमानेंट इंप्लाई को या जो मजीठिया के दायरे में नहीं आते हैं, उन्हें प्रिंट डिवीजन में रखा गया है.

लेखक यशवंत सिंह भड़ास4मीडिया के एडिटर हैं. अगर आपको भी इस प्रकरण पर कुछ मालूम हो, कोई नई जानकारी देनी हो तो यशवंत तक अपनी बात [email protected] या 09999330099 के जरिए पहुंचा सकते हैं.


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