Chanchal Bhu : कंवल भारती ने ऐसा लिखा कि पुलिस को अखर गया . पुलिस ने वही किया जो वह अंग्रेजों के जमाने से करती आ रही है. 'हम सुधरेंगे नहीं' .कँवल भारती को गिरफ्तार किया. क़ानून ने जमानत दे दिया. सरकार को नहीं मालूम कि रामपुर में क्या हुआ (शायद, यह हमारा अनुमान है क्योंकि सरकार अगर तबियत से गिरफ्तार करती तो जमानत लेने में दिक्कत होती). अब पुलिस को देखिये और जानिये. अव्वल तो यह जाहिलों की फ़ौज है. कम पढ़ी लिखी है. जो पढलिख कर भी आते हैं खाकी ओढते ही सब झन्न हो जाता है.
हमारे सूबे यानी उत्तर प्रदेश तो इस पुलिसिया सवाल पर निहायत ही बद्तमीज रही हैं. इनके ऊपर काम का बोझ. जानवरों से भी बदतर स्थिति. (मैं भड़का नहीं रहा हूँ, देख रहा हूँ. पुलिस महकमे में दो जानवर और आते है. कुत्ता और घोड़ा. सुविधा और रखरखाव को देखा जाय तो मजेदार आंकडा खुलता है. और मजे की बात यह कि जिम्मेवारी कुछ नहीं. कुत्ते ने सुंघा थोड़ा सैर किया और मुंह फुला कर लौट आया. और घोड़े को देखिये उसकी आदत होती है वह आदमी के ऊपर पैर नहीं रखता. यह उसकी सभ्यता है. वह बद्तमीज नहीं है.
उसके ठीक उलट पुलिस है. वह लात-जूते से ताफ्सीस ही शुरू करती है. यह हम नहीं कह रहे हैं, उच्चतम न्यायालय हर रोज बोल रहा है. पुलिस सुधारों पर कई सरकारों ने शुरुआत भी कर दिया है लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस कन्नी काट रही है. इसके जितने आफिसर थे समझदार और दमदार थे लेकिन वे जातीय खांचे में नहीं आते रहे. उन्हें अलग अलग महकमों में डाल दिया गया. कईयों को जानता हूँ लेकिन वे फंसें न, इसलिए सब का नाम नहीं ले रहा हूँ. विभूति नारायण राय …….. वी पी सिंह . डॉ प्रसाद … वगैरह वगैरह . ऐसे आफिसर खुद किनारा कर लिए या फिर उन्हें किनारे कर दिया गया. महाराष्ट्र सरकार की तरह अखिलेश सरकार को भी चाहिए कि कँवल भारती के सवाल पर जांच का ऐलान करे और पुलिस को 'आइन्दा' की चेतावनी देकर मुस्कुराए.
चंचल के फेसबुक वॉल से.






