Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

महाराष्‍ट्र में पत्रकारों पर हमला नहीं बनेगा गैरजमानती

: विरोध में नागपुर में पत्रकार 15 को निकालेंगे मोर्चा : मुंबई : पत्रकारों पर होने वाले हमलों को गैर-जमानती बनाने संबंधी कानून को लागू न किए जाने से नाराज पत्रकार हल्ला विरोधी कृति समिति ने विधान मंडल अधिवेशन के दौरान मुख्यमंत्री की चाय पार्टी का वहिष्कार करने का निर्णय लिया है. आगामी 15 दिसंबर को नागपुर में पत्रकारों का मोर्चा आयोजित किया गया है. इसमें राज्यभर के करीब 1500 पत्रकार भाग लेंगे. अधिवेशन के दौरान विधान मंडल की कार्यवाही कवर करने वाले पत्रकार हाथ पर काली पट्टी बांध कर अपना विरोध दर्शाऐंगे. हालांकि इस दौरान होनी वाली मुख्यमंत्री की प्रेस काफ्रेंस का वहिष्कार नहीं किया जाएगा.

: विरोध में नागपुर में पत्रकार 15 को निकालेंगे मोर्चा : मुंबई : पत्रकारों पर होने वाले हमलों को गैर-जमानती बनाने संबंधी कानून को लागू न किए जाने से नाराज पत्रकार हल्ला विरोधी कृति समिति ने विधान मंडल अधिवेशन के दौरान मुख्यमंत्री की चाय पार्टी का वहिष्कार करने का निर्णय लिया है. आगामी 15 दिसंबर को नागपुर में पत्रकारों का मोर्चा आयोजित किया गया है. इसमें राज्यभर के करीब 1500 पत्रकार भाग लेंगे. अधिवेशन के दौरान विधान मंडल की कार्यवाही कवर करने वाले पत्रकार हाथ पर काली पट्टी बांध कर अपना विरोध दर्शाऐंगे. हालांकि इस दौरान होनी वाली मुख्यमंत्री की प्रेस काफ्रेंस का वहिष्कार नहीं किया जाएगा.

गुरुवार को प्रसे क्लब में आयोजित पत्रकार परिषद में समिति के पदाधिकारियों ने यह बात कही. समिति के पदाधिकारी एसएम देशमुख ने कहा कि पिछले दो माह के दौरान राज्यभर में पत्रकारों पर हमले के 22 मामले सामने आ चुके हैं. बीते डेढ साल में महाराष्ट्र में 209 पत्रकार हमलों के शिकार हो चुके हैं. दस सालों में 856 पत्रकारों से हमले की घटनाए हुई हैं. पत्रकारों के अलावा पिछले 10 सालों में मीडिया हाऊसों पर हमले की 30 घटनाएं हो चुकी हैं. 1978 से अब तक राज्य में 11 पत्रकारों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. इसके बावजूद सरकार पत्रकारों पर हमले रोकने के लिए कानून बनाने के लिए तैयार नहीं जबकि डॉक्टरों को लेकर इस तरह का विशेष कानून बन चुका है. लम्बे समय से इस तरह का कानून बनाने का प्रस्ताव राज्य सरकार के पास विचाराधीन है.

देशमुख ने कहा कि राज्य के उद्योग मंत्री नारायण राणे की अध्यक्षता में गठित मंत्रिमंडलीय उप समिति ने इन सभी बातों को नजर अंदाज कर अपनी रिपोर्ट तैयार की है. बता दे कि राणे ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पत्रकारों के लिए विशेष कानून बनाने की कोई जरुरत नहीं है. पत्रकारों को इस बात आभास उसी समय हो गया था. जब राणे इस कमेटी के अध्यक्ष बनाए गए थे. क्योंकि राणे की छवि मीडिया विरोधी नेता की रही है.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...