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सुख-दुख...

महाशतक और डिब्बे वालों की विरह-वेदना

आलाप तो कोई एकाध बरस से चल ही रहा है, फिलहाल डिब्बे वाले राग जैजैवंती में विलंबित खयाल पेश कर रहे हैं। जैसे ही महाशतक पूरा होगा विलंबित खयाल द्रुत में बदल जायेंगे- सचिन को भारत रत्न दो। अपनी तौर पर बेचारे डिब्बे वाले जी तोड़ कोशिश में लगे हैं। हर मैच के पहले फर्मान जारी होता है- ‘कोटला में नही तो कोलकाता में सही’, ‘सचिन लगाओ महाशतक’ वगैरह। कुछ डिब्बे वाले जो अपनी हेडिंग हमेशा प्रश्नवाचक चिन्हों के साथ लगाते हैं उनकी भाषा भी महाशतक के लिये बदल जाती है। वे नहीं कहते कि ‘क्या लगेगा महाशतक?’

आलाप तो कोई एकाध बरस से चल ही रहा है, फिलहाल डिब्बे वाले राग जैजैवंती में विलंबित खयाल पेश कर रहे हैं। जैसे ही महाशतक पूरा होगा विलंबित खयाल द्रुत में बदल जायेंगे- सचिन को भारत रत्न दो। अपनी तौर पर बेचारे डिब्बे वाले जी तोड़ कोशिश में लगे हैं। हर मैच के पहले फर्मान जारी होता है- ‘कोटला में नही तो कोलकाता में सही’, ‘सचिन लगाओ महाशतक’ वगैरह। कुछ डिब्बे वाले जो अपनी हेडिंग हमेशा प्रश्नवाचक चिन्हों के साथ लगाते हैं उनकी भाषा भी महाशतक के लिये बदल जाती है। वे नहीं कहते कि ‘क्या लगेगा महाशतक?’

प्रश्न के उत्तर के लिये उनके पास धैय नहीं है। फिर उत्तर नकारात्मक भी हो सकता है। इसलिये सीधे आदेश जारी कर दिया जाता है, ‘‘सचिन लगाओ महाशतक!’’ 121 करोड़ जनता को महाशतक का इंतजार है। ये आंकड़ा डिब्बेवालों ने कहां से निकाला है मुझे नहीं मालूम। मुझे तो महाशतक का इंतजार नहीं है। मेरे साथ कुछ और भी लोग है जो बहुत थोडे हैं पर जानते हैं कि क्रिकेट अफीम के सिवा और कुछ भी नहीं है और यह बारहमासी तमाशा भारत का नहीं बल्कि इंडिया का है। लेकिन डिब्बे वाले भारत के लोगों का अपनी गिनती में शुमार नहीं करते।

26 जनवरी नजदीक आ रही है। पिछली बार डिब्बे वालों ने सचिन को लगभग भारत रत्न बना ही दिया था। लता दीदी का इंटरव्यू भी था। अंबिका सोनी की भी सिफारिश थी। संजय निरूपम भी बोले थे। सारे फुटेज पड़े हुए हैं। कुछ ने नये सिरे से एडिट कर लिये होंगे। इधर महाशतक लगा और उधर जैजैवंती में द्रुत खयाल शुरू।

अभी कोलकाता में दूसरी पारी बाकी है। डिब्बे वाले आंखें गड़ाकर देख रहे हैं। लगाओ, महाशतक लगाओ, जल्दी लगाओ, तुरंत लगाओ, अब लगा ही लो, बस अब सहा नहीं जाता। महाशतक की विरह-वेदना बढ़ती जा रही है। डिब्बेवालों का प्रेशर बढ़ रहा है। महाशतक बनाने का प्रेशर इतना ज्यादा है कि महाशतक बन नहीं पा रहा है। धोनी नाराज हैं मीडियावालों से कि प्रेशर के चलते महाशतक नहीं बन रहा है।

एक डिब्बे वाले ने बड़ी-लंबी चौड़ी रिसर्च करके बताया कि महाशतक की राह में दो रोड़े हैं। एक तो आजकल अपने राजदुलारे एल.बी. डब्ल्यू हो जाते हैं और दूसरे कोलकाता में साइट-स्क्रीन की ऊंचाई महज 16 फीट है। दादा का इंटरव्यू भी ले लिया। वैज्ञानिक तरीके से दर्शकों को समझाया कि सचिन की हाइट थोड़ी कम है। इसलिए साइट-स्क्रीन की ऊंचाई कम होने से एंगल थोड़ा छोटा हो जाता है और महाशतक के अर्जुन को बॉल मछली के ऑंख की तरह नजर नहीं आती। दादा ने कहां कि हां सही बात है, पर स्क्रीन को बड़ा करने से सीट कम हो जाती है और आयोजकों को नुकसान उठाना पड़ता है। फिर भी नुकसान उठाते हुए स्क्रीन को ऊंचा कर दिया। डिब्बेवाले ने कहा कि महाशतक की राह के दो रोड़े सचिन ने दूर कर लिये हैं और महाशतक लगने ही वाला है, इसलिये हे जनता माईबाप टीवी स्क्रीन से नजरें नहीं हटाना, बस हम अभी आते हैं लौटकर! फिर भी महाशतक है कि लगा नहीं। डिब्बेवाले को गुस्सा आ गया, कहा, ‘क्या हो गया है सचिन को, आठ महीनों से कोई शतक नहीं लगा?

राहुल गांधी यूपी के लोगों से कहते हैं, तुम्हें राज्य की बदहाली पर गुस्सा नहीं आता? मायावती राहुल से कहती हैं, ‘ तुम्हें महंगाई पर दिनेश चौधरीगुस्सा नहीं आता?’ टीम अन्ना कहती है, ‘तुम्हें भ्रष्टाचार पर गुस्सा नहीं आता?’ भाजपा वाले कहते हैं, ‘तुम्हें दिग्विजय पर गुस्सा नहीं आता?’ महाशतक नहीं लगने पर अब डिब्बेवाले पूछ रहे हैं‘ तुम्हें सचिन पर गुस्सा नहीं आता?’ जनता बेचारी निरीह ठहरी। किस -किस पर गुस्सा करे ? गुस्सा आ भी गया तो कोई फायदा है क्या, कोई वोट बटोरने में लगा है कोई टीआरपी!

लेखक दिनेश चौधरी पत्रकार, रंगकर्मी और सोशल एक्टिविस्ट हैं. सरकारी नौकरी से रिटायरमेंट के बाद भिलाई में एक बार फिर नाटक से लेकर पत्रकारिता तक की दुनिया में सक्रिय हैं. वे इप्‍टा, डोगरगढ़ के अध्‍यक्ष भी हैं. उनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है. दिनेश चौधरी के लिखे अन्य लेख को इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं… भड़ास पर दिनेश

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