ये तस्वीर फेसबुक पर कुछ लोगों ने शेयर की है…

लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू ये है कि दिल्ली में होने वाली छोटी घटनाएं भी बड़ा मीडिया कवरेज पा जाती हैं जिसके कारण दिल्ली का नाम-बदनाम पूरे देश में होता है. पर अन्य प्रदेशों में तो सब कुछ स्थानीय लेवल पर मैनेज कर लिया जाता है. प्रशासन, पत्रकार, नेता सबके सब लीपापोती में जुट जाते हैं. यूपी का ही हाल लीजिए. शायद ही कोई जिला हो जहां रेपकांड न होता हो, और जघन्य से जघन्य रेपकांड. पर वे अखबारों की सुर्खियां नहीं बन पातीं, क्योंकि अखबार स्थानीय शासन-प्रशासन के इशारे पर चलते हैं इसलिए शासन-प्रशासन के लिए धब्बा बनने वाली खबरों-घटनाओं को अंडरप्ले कर देते हैं. गाजीपुर जिले में मैं पिछले दिनों गया था तो वहां देखा कि एक बच्ची से रेपकांड के मामले में पुलिस प्रशासन का व्यवहार बेहद शर्मनाक रहा. गैंगरेप की शिकार लड़की को ढंग का इलाज तक नहीं मिला. उसे जिला अस्पताल में लाकर पटक दिया गया था. मीडिया ने भी इसे बड़ा मसला नहीं माना. ऐसे में सिर्फ दिल्ली की डरावनी तस्वीर पेश करना पर्याप्त नहीं होगा बल्कि जहां कहीं रेप हो, वहां सभी पार्टियां सक्रिय हो जाएं तो बात बने. पर भाजपा के लिए कांग्रेस शासित दिल्ली में रेपकांड मुद्दा बन सकता है लेकिन मध्य प्रदेश में हुआ रेपकांड नहीं. ऐसे आंशिक और स्वार्थी नजरिये से भला नहीं, नुकसान होगा.
-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया






