: विद्यार्थी निकालेंगे विजय जुलूस : नई दिल्ली। देश के जाने माने बुद्धिजीवियों और एकडमिशियनों के दबाव में जेएनयू प्रसाशन ने महिषासुर-दुर्गा विवाद में अनावश्यक हस्तेक्षप की अपनी गलती स्वीकार कर ली है। शनिवार को जेएनयू प्रशासन ने खुद इससे संबंधित नोटिस जेएनयू के सभी हॉस्टलों व स्टडी सेंटर में चिपकाया है। चीफ प्रोक्टर एचबी बोहिदार की ओर से जारी इस नोटिस में उन्होंने साफ शब्दों में कहा है एआइबीएसएफ पर इस मुददे पर अब कोई प्रोक्टोरियल जांच नहीं चल रही है। उन्होंने एक अंग्रेजी अखबार को दिये गये अपने बयान के लिए जेएनयू कम्यूनिटी से मांगते हुए है कि अखबार ने उनके बयान गलत ढंग से प्रकाशित किया गया था, लेकिन इससे जिन लोगों की भावनाएं आहत हुई है, उनके प्रति वे खेद प्रकट करते हैं। जेएनयू के छात्र आंदोलनों के इतिहास में प्रशासन की ओर से ऐसा माफीनाम पहली बार आया है।
गौरतलब है कि जेएनयू के छात्र संगठन 'ऑल इंडिया बैकवर्ड स्टूडेंटस फोरम' (एआइबीएसएफ) ने दुर्गा पूजा के दौरान 'फारवर्ड प्रेस' में प्रकाशित लेख 'किसकी पूजा कर रहे हैं बहुजन?' के अंश को पोस्टर के रूप में कैंपस में जारी किया था। उक्त लेख में नये शोधों से हवाले से कहा गया था कि महिषासुर बहुजन तबके का न्यायप्रियऔर प्रतापी राजा था, आर्यों ने शूद्र कुल की ही कन्या दुर्गा के हाथों उनका छल पूर्वक वध करवाया था। एआइबीएसएफ ने बहुजन तबके के लोगों का आह्वान किया था वे महिषासुर को अपना नायक मानें न कि आर्यों (सवर्णों) का साथ देने वाली दुर्गा को। इस बात पर आखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् (एवीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने एआइबीएसएफ के कार्यकर्ताओं पर हमला बोल दिया था, जिसकी रिपोर्ट वसंत कुंज थाने में की गयी थी। बाद में इस पर यूनिवर्सिटी की ओर, प्रोक्टेरियल जांच शुरू हुई, जिसमें उलटे एआइबीएसएफ के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार यादव को ही 'धार्मिक भावनाओं को आहत' करने के आरोप में नोटिस जारी कर दिया गया । साथ ही चीफ प्रोक्टर ने एक अंग्रेजी अखबार (संडे स्टैंडर्ड, 31 अक्टूबर) का दिये गये बयान में एआइबीएसएफ को जातिवादी संगठन करार देते हुए यूथ फॉर यूक्विलिटी और एबीवीपी जैसे संगठनों को क्लिन चिट दे दी। इसके बाद एआइबीएसएफ समेत सभी वाम संगठनों ने विरोध प्रदर्शन कर चीप प्रोक्टर से लिखित माफी मांगने की मांग की थी।
इस संबंध में आयोजित जेएनयू प्रशासन की एक उच्चस्तरीय बैठक में चीफ प्रोक्टर द्वारा दिये गये बयान को आपत्तिजनक पाया गया तथा उन्हें लिखित माफी मांगने के लिए कहा गया। विश्वविद्यालय प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान 'फारवर्ड प्रेस', जिस द्विभाषिक पत्रिका में उक्त लेख छपा था, उसकी विश्वसनीयता पर भी विचार किया गया। बैठक में उपस्थित अधिकारियों व प्राध्यापकों ने पाया कि पत्रिका का संपादकीय बोर्ड और नियमित लेखकों में भारत के प्राय: सभी प्रमुख बहुजन समर्थक एकडमिशयन और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल है, जिनकी सहमति से ही कोई भी सामग्री पत्रिका में प्रकाशित की जाती है। इनमें प्रमुख हैं इग्नू की आंबेडकर पीठ की अध्यक्ष गेल ऑमवेट, हैदाराबाद यूनिवर्सिटी के प्रोफसर व चर्चित किताब 'मैं हिंदू क्यों नहीं हू?' के लेखक कांचा अयलैया, आयवन कोस्का, दिलीप मंडल, प्रमोद रंजन व यूरोप में रहकर शोध कार्यों से जुडे प्रभुगुप्त तारा, विशाल मंगलवादी आदि हैं। इसके अलावा दिल्ली स्थित कई अन्य लेखकों व इतिहासकारों ने भी जेएनयू प्रशासन के इस कदम का विरोध किया था। खुद जेएनयू के कई प्रोफेसरों का मानना था कि जेएनयू वाद-विवाद और संवाद का केंद्र रहा है, जिससे नये शोधों को बढ्वा मिलता है। चीप प्रोक्टर का यह कदम अलोकतांत्रिक और जेएनयू की अकादमिक गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाला है।
चीफ प्रोक्टर के माफीनामे को जेएनयू प्रशासन द्वारा सार्वजनिक रूप से जारी किये जाने से जेएनयू के विद्याथिैयों में खुशी की लहर दौड गयी है। इस विषय पर सभी विद्यार्थी संगठनों की बैठक के बाद विजय जुलूस निकाला जाएगा। एआइबीएसएफ के अध्यक्ष जितेंद्र यादव, उपाध्यक्ष विनय कुमार, प्रवक्ता जिग्मी वांग्दी और आकाश टिर्की ने कहा कि संगठन हर वर्ष जेएनयू समेत अपने प्रभाव वाली सभी यूनिवर्सिटियों 25 अक्टूबर को महिषासुर की शहादत दिवस मानाएगा।
फोरम से प्रतिबंध हटाने की मांग
एआइबीएसएफ ने मांग की है कि जेएनयू प्रशासन 'जेनयू फोरम अगेंस्ट वार एंड पीपुल' पर लगा प्रतिबंध भी जल्दी हटाये। संगठन के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार यादव ने कहा कि प्रतिबंध हटाने के मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे विद्यार्थियों की लडाई में एआइबीएसएफ भी साथ है। गौरतलब है कि जेएनयू में इस फोरम द्वारा अरूंधति राय का एक कार्यक्रम करवाने के बाद से ही इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था। फोरम पर राष्ट्र ध्वज का अपमान करने का आरोप है। एआइबीएएसएफ रविवार को अपनी आंतरिक बैठक आयोजित करेगा। बैठक में आगे की रणनीति पर विचार करने के साथ ही संगठन में नये सक्रिय हुए कार्यकर्ताओं को पदभार दिया जाएगा। संगठन के प्रवक्ता आकाश टिर्की ने बताया कि संगठन में पहले से पदभार संभाल रहे लोगों में कोई परिवर्तन नहीं होगा। इस दौरान सिर्फ कुछ नये नाम जोडे जाएंगे।
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