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महुआ न्यूज़ लाइन के कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन धरना जारी

 

महुआ न्यूज़चैनल के कर्मचारियों ने पहली रात न्यूज़रूम में बिता ली है। मस्त माहौल में। अब दूसरे दिन आंदोलन को निर्णायक मोड़ पर पहुंचाने की तैयारियां परवान पर हैं। जिसके तहत सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों, वरिष्ठ पत्रकारों, पत्रकार यूनियनों और राजनीतिक दलों के मुखर नेताओं को महुआ न्यूज़चैनल के न्यूज़रूम में आंदोलनरत पत्रकारों को संबोधित करने बुलाया जा रहा है। इनमें एनबीए के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। ताकि न्यूज़चैनल खोलकर अचानक इस पर ताला लगानेवाले धन्नासेठों की आगे से हिम्मत न हो कि वो दूसरों को उसका हक दिलाने की लड़ाई लड़नेवाले पत्रकारों के साथ ऐसा सलूक फिर कर सकें।

 

महुआ न्यूज़चैनल के कर्मचारियों ने पहली रात न्यूज़रूम में बिता ली है। मस्त माहौल में। अब दूसरे दिन आंदोलन को निर्णायक मोड़ पर पहुंचाने की तैयारियां परवान पर हैं। जिसके तहत सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों, वरिष्ठ पत्रकारों, पत्रकार यूनियनों और राजनीतिक दलों के मुखर नेताओं को महुआ न्यूज़चैनल के न्यूज़रूम में आंदोलनरत पत्रकारों को संबोधित करने बुलाया जा रहा है। इनमें एनबीए के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। ताकि न्यूज़चैनल खोलकर अचानक इस पर ताला लगानेवाले धन्नासेठों की आगे से हिम्मत न हो कि वो दूसरों को उसका हक दिलाने की लड़ाई लड़नेवाले पत्रकारों के साथ ऐसा सलूक फिर कर सकें।
 
आपको बता दें कि महुआ न्यूज़ चैनल के 100 से ज्यादा कर्मचारियों को बिना किसी नोटिस के महुआ समूह ने नौकरी से हटा दिया है। इसमें आउटपुट, इनपुट, एडिटिंग, ग्रॉफिक्स और पीसीआर की टीम शामिल है। एक झटके में इन पत्रकारों को एचआर विभाग ने बुलाकर कहा कि ये चैनल आज से बंद किया जाता है और आपको कल से कार्यालय आने की ज़रूरत नहीं है। इस फैसले की गाज जिन कर्मचारियों पर गिरी है उनमें बड़ी संख्या में महिला पत्रकार भी शामिल हैं। 
 
महुआ मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने जनवरी 2012 में इस चैनल को लॉंच किया था। इससे पहले नवंबर 2011 में ही ज्यादातर कर्मचारियों की कंपनी ने भर्ती की थी। लेकिन अब तक किसी भी कर्मचारी को सिवाय ऑफर लेटर और आईकार्ड के कोई कागजात कंपनी की तरफ से नहीं दिए गए। आज-कल करते हुए उन्हें नियुक्ति पत्र तक नहीं दिया गया। ईपीएफ के नाम पर बड़ी संख्या में कर्मचारियों के वेतन से राशि की कटौती भी हुई लेकिन कंपनी की तरफ से किसी को ईपीएफ अकाउंट तक नहीं दिया गया। श्रम कानूनों के लिहाज से जिस तरह किसी भी संस्थान को बंद करने से पहले कर्मचारियों को पूरा बकाया वेतन और
क्षतिपूर्ति दिए जाने का प्रावधान है। उसका महुआ मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने पूरी तरह उल्लंघन किया है।
 
हैरत इस बात की है कि कंपनी ने अपने फरमान के बाद सभी कर्मचारियों को एक झटके में कार्यालय परिसर से बाहर जाने का हुक्म सुना दिया। ये फैसला जान बूझकर रविवार के दिन लिया गया ताकि कर्मचारियों की कम संख्या होने के कारण इसका ज्यादा विरोध नहीं हो। लेकिन इस फैसले की भनक लगते ही महुआ न्यूज चैनल के सभी कर्मचारी दफ्तर पहुंचे और उन्होंने प्रबंधन से साफ कर दिया कि जब तक आप बकाया वेतन और कानूनी तौर पर तय क्षतिपूर्ति नहीं देंगे तब तक कोई न्यूज़रूम को खाली नहीं करेगा। इसके बाद से लगातार महुआ प्रबंधन कर्मचारियों को संस्थान से बाहर करने की धमकी दे रहा है। इसके लिए जबर्दस्ती करने की भी कोशिश लगातार जारी है। लेकिन महुआ न्यूजलाइन के सभी कर्मचारियों का ऐलान है कि जब तक बकाया वेतन और क्षतिपूर्ति की कानूनी तौर पर तय रकम उनके बैंक अकाउंट में कैश नहीं होती तब तक वे न्यूज़रूम नहीं छोड़ेंगे। शांतिपूर्ण तौर पर अन्ना आंदोलन की तर्ज पर उनका विरोध जारी रहेगा और सख्ती होने पर बाकी रास्ते अख्तियार करने पर भी विचार होगा।
 
कंपनी प्रबंधन इस वक्त समूह के प्रमुख पी के तिवारी की पत्नी मीना तिवारी देख रही हैं। गायत्री परिवार से जुड़ीं मीना तिवारी को एक धार्मिक विचारों की संस्कारित महिला माना जाता रहा है लेकिन प्रज्ञा चैनल को बंद किए जाने के बाद महुआ न्यूज़लाइन को बंद करने में उनकी बड़ी भूमिका रही। पी के तिवारी सीबीआई की गिरफ्तारी के बाद जेल में बंद हैं। ऐसे में मीना तिवारी को चैनल बंद करने की कौन सी जल्दबाजी आन पड़ी ये समझ से बाहर है। पी के तिवारी तमाम मुश्किलों के बावजूद यूपी-उत्तराखंड के इस ड्रीम चैनल को बंद करने को तैयार नहीं थे। हर परिस्थिति में उन्होंने चैनल से जुड़े वरिष्ठ पत्रकारों से यही कहा कि हम यूपी-उत्तराखंड चैनल को किसी हाल में बंद नहीं करेंगे बल्कि इसका और विस्तार करेंगे। 
 
चैनल बेहतरीन आउटपुट दे रहा था, उत्तराखंड में इसकी मजबूत पहचान बन गई थी। यूपी के 25 जिलों में इसकी पहुा थी। डिस्ट्रीब्यूशन के भारी भरकम खर्चों को उठाने में दिक्कत की वजह से बाकी के जिलों और प्रमुख टीआरपी सेंटर्स पर ये चैनल दिख नहीं पाया। जिसके कारण टीआरपी की होड़ में ये प्रतिस्पर्धी चैनलों को पटखनी नहीं दे पाया। अगर डिस्ट्रीब्यूशन बेहतर हुआ होता तो ऐसा होने में देर नहीं लगती। जैसा कि महुआ न्यूज़ के बिहार-झारखंड के चैनल ने सफलता का कीर्तिमान बनाया इस चैनल ने भी ये रिकॉर्ड यूपी-उत्तराखंड में बनाया होता। लेकिन इसे मौका ही नहीं दिया गया और न ही महुआ की खराब वित्तीय हालत की वजह से इसके लिए जरूरी उपाय किए जा सके। ऐसे में ये समूह की विफलता थी पत्रकारों की टीम की नहीं। लेकिन सेल्स, मार्केटिंग के लोगों की बजाय सबसे पहले पत्रकारों को निशाना बनाया गया और एक झटके में पी के तिवारी की गैरमौजूदगी में समूह की कमान संभाल रही मीना तिवारी के ‘प्रज्ञा चक्षु’बंद हो गए और उन्होंने पूरी तरह गैरकानूनी काम करने की तरफ कदम बढ़ा दिया।
 
बांग्ला के ड्रीम चैनल महुआ बांग्ला एंटरटेनमेंट और न्यूज़ चैनल महुआ ख़ोबोर के साथ हिंदी आध्यात्मिक चैनल प्रज्ञा की प्रोडक्शन यूनिट को पूरी तरह बंद करने के फैसले में बड़ी भूमिका निभानेवाली मीना तिवारी का कहना था कि हमने इन तमाम चैनलों से जुड़े लोगों को वेतन के अलावा कोई क्षतिपूर्ति नहीं दी तो फिर महुआ न्यूज़लाइन के कर्मचारियों को क्यों देंगे। ये बातें उनकी तरफ से उनके प्रतिनिधि लगातार भुक्तभोगी कर्मचारियों तक पहुंचा रहे हैं। लेकिन मीना तिवारी को खुद न्यूज़रूम में अपनी संस्था के सदस्य रहे पत्रकारों से मिलने की फुर्सत नहीं। वो इससे बार-बार इनकार कर रही हैं। लेकिन इससे न्यूज़लाइन के कर्मचारियों पर कोई असर नहीं। आंदोलन लगातार जारी है। और वो इसे आर-पार की शक्ल देने को तैयार हैं..ताकि लॉंचिंग के 7 वें महीने में दम तोड़ चुका महुआ न्यूज़ लाइन कम से कम हिंदी मीडिया में एक लकीर खींच जाए कि आगे कोई कंपनी प्रबंधन इस तरह के गैरकानूनी कदम उठाने की हिम्मत न कर पाए।
 
महुआ न्यूज़ लाइन के कर्मचारियों की तरफ से भेजा गया पत्र. 
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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