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महुआ न्‍यूज के कर्मचारियों को मिला इंक्रीमेंट का तोहफा

महुआ ग्रुप के अलसाए माहौल में एक खबर ताजा हवा के झोंके की तरह आई है. अर्से बाद कर्मचारियों में उत्‍साह का संचार हुआ है. कंपनी ने लांचिंग के समय से जुड़े तथा एक औसत से नीचे वेतन पाने वालों की सेलरी में इंक्रीमेंट किया है. सूत्रों का कहना है कि ग्रुप हेड राणा यशवंत के प्रसास की बदौलत दस हजार के आसपास सेलरी पाने वाले सभी कर्मचारियों को इंक्रीमेंट का तोहफा मिला है. अब उनकी सेलरी थोड़ी सम्‍मानजनक हो गई है.

महुआ ग्रुप के अलसाए माहौल में एक खबर ताजा हवा के झोंके की तरह आई है. अर्से बाद कर्मचारियों में उत्‍साह का संचार हुआ है. कंपनी ने लांचिंग के समय से जुड़े तथा एक औसत से नीचे वेतन पाने वालों की सेलरी में इंक्रीमेंट किया है. सूत्रों का कहना है कि ग्रुप हेड राणा यशवंत के प्रसास की बदौलत दस हजार के आसपास सेलरी पाने वाले सभी कर्मचारियों को इंक्रीमेंट का तोहफा मिला है. अब उनकी सेलरी थोड़ी सम्‍मानजनक हो गई है.

उल्‍लेखनीय है कि चैनल की लांचिंग के समय ही काफी लोग आठ से दस हजार रुपये या इससे थोड़ी ऊपर नीचे के वेतन पर रखे गए थे. इस दौरान कई बदलाव हुए. महुआ में कई आंधियां आईं, कई राजा धराशाई हुए कई वजीर राजा बने परन्‍तु रूट लेबल पर काम करने वाले इन कर्मचारियों की तरफ किसी का ध्‍यान नहीं गया. ये पिछले तीन से चार साल से एक ही वेतन पर काम कर रहे थे. फील्‍ड की अनिश्चितता और मौकों के अभाव के चलते ये लोग चाहकर भी महुआ से रहने का नशा नहीं छोड़ पा रहे थे. प्रबंधन को गरियाते-अपने को तसल्‍ली देते काम करते चले जा रहे थे.

देर से ही सही पर ग्रुप हेड के प्रयास से इन लोगों के चेहरे पर लम्बे अर्से बाद मुस्‍कान की लकीरें देखने को मिली हैं. बताया जा रहा है कि ज्‍यादातर लोगों की सेलरी में तीन से पांच हजार तक का इंक्रीमेंट दिया गया है. सूत्र ये भी बता रहे हैं कि अगर सब कुछ सही रहा तो अन्‍य लोगों को भी इंक्रीमेंट का तोहफा मिल सकता है. खैर, इंक्रीमेंट का असर काम पर भी देखने को मिल रहा है. कर्मचारियों में उत्‍साह है. उनके निराश हो चुके मन में आशा का संचार हुआ है. वहां काम करने वाले एक पत्रकार ने बताया कि राणा यशवंत के प्रयास से ही हमलोगों की गरीबी थोड़ी दूर हुई है, अन्‍यथा हमलोगों ने तो उम्‍मीदें ही छोड़ दी थी.

हालांकि अभी वरिष्‍ठ लेबल पर इंक्रीमेंट नहीं हुआ है. गौरतलब है कि महुआ ग्रुप पिछले कुछ समय में काफी उठा-पटक के दौर से गुजरा है. अच्‍छा खासा चल रहा चैनल प्रबंधन की अपनी ही राजनीति का शिकार हो गया. राजाओं को आए दिन मोहरों की तरह फेंटने के चलते यहां का माहौल खराब हो गया था, परन्‍तु आजतक जैसे चैनल से राणा यशवंत के जुड़ने के बाद इसमें थोड़ी सुधार देखने को मिलने लगा. कई अन्‍य वरिष्‍ठ तथा जाने-माने पत्रकार भी महुआ से जुड़े, जिससे इस चैनल का प्रजेंटेशन भी ठीक हुआ है. पर कहा जा रहा है कि इसकी स्थिति तभी तक ठीक होगी जब‍तक पीके तिवारी एंड कंपनी की राजनीति बंद रहेगी.

 

 
 

 
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