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महुआ प्रबंधन ने मानी गलती, सौ फीसदी मांग कबूल

 

महुआ न्यूज़लाइन के पत्रकारों की लड़ाई जीत की तरफ है। हो सकता है देर रात तक ये ख़बर मिले कि उनकी सौ फीसदी मांगें मान ली गई हैं। प्रबंधन के दूत ने धरने पर बैठे पत्रकारों के बीच डेढ़ बजे दिन में इसका ऐलान किया है। प्रबंधन ने अपनी तरफ से हुई किसी भी गलती के लिए बिना शर्त खेद जाहिर किया और कहा कि हम चाहते हैं कि हर गतिरोध आज दूर हो जाए और आपकी मांग हमने स्वीकार करने का फैसला किया है। जिसके बाद महुआ न्यूजलाइन के पत्रकारों ने इसका स्वागत किया। लेकिन ये भी साफ कर दिया कि जब तक बकाए वेतन की राशि अकाउंट में कैश नहीं होती न्यूज़रूम में उनका सांकेतिक धरना जारी रहेगा। और उनकी तरफ से ऐसा कुछ नहीं होगा जिससे परिसर में चल रहे महुआ समूह के बिहार में नंबर वन चैनल हुआ न्यूज़ बिहार-झारखंड के प्रसारण में कोई दिक्कत नहीं हो।

 

महुआ न्यूज़लाइन के पत्रकारों की लड़ाई जीत की तरफ है। हो सकता है देर रात तक ये ख़बर मिले कि उनकी सौ फीसदी मांगें मान ली गई हैं। प्रबंधन के दूत ने धरने पर बैठे पत्रकारों के बीच डेढ़ बजे दिन में इसका ऐलान किया है। प्रबंधन ने अपनी तरफ से हुई किसी भी गलती के लिए बिना शर्त खेद जाहिर किया और कहा कि हम चाहते हैं कि हर गतिरोध आज दूर हो जाए और आपकी मांग हमने स्वीकार करने का फैसला किया है। जिसके बाद महुआ न्यूजलाइन के पत्रकारों ने इसका स्वागत किया। लेकिन ये भी साफ कर दिया कि जब तक बकाए वेतन की राशि अकाउंट में कैश नहीं होती न्यूज़रूम में उनका सांकेतिक धरना जारी रहेगा। और उनकी तरफ से ऐसा कुछ नहीं होगा जिससे परिसर में चल रहे महुआ समूह के बिहार में नंबर वन चैनल हुआ न्यूज़ बिहार-झारखंड के प्रसारण में कोई दिक्कत नहीं हो।
 
भले ही औपचारिक ऐलान हो गया हो लेकिन आंदोलन का जज्बा जारी है। मामला पूरी तरह सुलझने तक इसकी सख्त ज़रूरत है। महुआ न्यूज़लाइन का आंदोलन एक शुरुआत है। मकसद है अन्याय नहीं सहना…इससे ज्यादा और कम कुछ और नहीं दोस्तों… जल्द ही हमारी जीत की औपचारिक खबर आप तक पहुंचेगी। एकजुट रहिए,.. अभी आवाज उठाने के कई मौके और आएंगे। अन्याय के खिलाफ प्रतिकार का ऐलान पूरा देश कर रहा है। सबकी आवाज बुलंद करनेवाले पत्रकार भी अब पीछे नहीं रहेंगे। एकजुटता की ये मशाल जलती रहनी चाहिए। हिंदी मीडिया का कोई भी पत्रकार चाहे वो कहीं भी काम करता हो… दशा और दुर्दशा सबकी एक जैसी है। इसलिए एक नई शुरुआत की जरूरत थी।
 
हिंदी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जगत में अपने हक के लिए आवाज उठाने की परिपक्वता अब तक कम ही देखी गई है… लेकिन अब बात आगे बढ़नी चाहिए। महुआ न्यूज़लाइन के आंदोलनकारी पत्रकारों की जीत इस पर पहली मुहर साबित होनेवाली है। ये सच है कि हमारी नौकरी गई है लेकिन हमने ये जान लिया है कि नौकरों के भी कुछ हक होते हैं और देश का कानून इस बात की गारंटी देता है कि उस पर आंच न आए। आगे आनेवाले वक्त में ये अनुभव काम आएगा।
 
महुआ न्यूज़लाइन के आंदोलनरत पत्रकारों द्वारा भेजा गया पत्र.
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