अम्बाला भास्कर के पत्रकार आशीष श्रीवास्तव के साथ वंहा के संपादक नरेंदर अकेला ने ऐसा व्यवहार किया जिसने पत्रकारीय और प्रबंधन की तमाम मर्यादाओं को चूर चूर कर दिया। आशीष का पंद्रह दिन का वेतन केवल इसलिए काट लिया गया क्योंकि वह अपने संपादक नरेंदर अकेला को बिना सूचित किये अपनी मां के देहांत की खबर मिलते ही घर निकल गया। जब आशीष माँ का दाह संस्कार एवं क्रिया करके वापिस कार्यालय आया तो पता चला कि संपादक ने पंद्रह की गैर हाजिरी लगा कर उसका वेतन कटवा दिया।
इस व्यवहार से नाराज आशीष ने भास्कर को अलविदा बोलकर आज समाज ज्वाइन कर लिया. वे कुछ माह पूर्व तरक्की की उम्मीद में आज समाज से ही भास्कर आये थे, परन्तु संपादक के अमानवीय व्यवहार ने उन्हें बहुत तकलीफ पहुंचाया, जिसके बाद वे आज समाज वापस लौट गए.





