औरंगाबाद। देव के कंचनपुर के पास नक्सलियों द्वारा दैनिक प्रभात खबर के पत्रकार उपेन्द्र कुमार चौरसिया की बेरहमी से पिटाई किये जाने की घटना से यह साफ हो गया है कि नक्सलग्रस्त इलाकों में काम करने वाले पत्रकार माओवादियों के निशाने पर हैं। नक्सलग्रस्त इलाको में काम करने वाले पत्रकारों का दर्द यह है कि न तो वे पुलिस की नजरों में विश्वसनीय है और न ही माओवादियों की नजरों में।
एक ओर जहां पुलिस नक्सलग्रस्त इलाके में काम करने वाले पत्रकारों से यह उम्मीद करती है कि वे नक्सलियों के बारे में खुफिया सूचना दें, दूसरी ओर नक्सली भी पत्रकारों से इसी तरह की उम्मीद करते हैं। दोनों ही स्थितियों में निशाने पर पत्रकार ही हैं। इतना ही नहीं पुलिस द्वारा पत्रकारों के मोबाइल को लिस्निंग पर लिये जाने की चर्चा जब तब होती ही रहती है। इन स्थितियों में नक्सल प्रभावित इलाकों में जाकर खबर लाना पत्रकारों के लिए दिन-प्रतिदिन दुरूह होता जा रहा है।
इन स्थितियों में यदि दोनों ओर से लोकतंत्र के चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों की विश्वसनीयता पर संदेह किया जायेगा तो निष्पक्ष पत्रकारिता कैसे हो सकेगी। अगर इलाके के अनुसार चर्चा करें तो जिले के नवीनगर, कुटुम्बा, देव, मदनपुर, रफीगंज, गोह एवं हसपुरा प्रखंड की गिनती सर्वाधिक नक्सलग्रस्त इलाके के रूप में होती है और सभी तरह की नक्सली घटनायें इन्हीं इलाकों में हुआ करती है। साथ ही इन इलाकों में जिला मुख्यालय में कार्यरत प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकार आये दिन किसी न किसी खास खबर को कवर करने के इरादे से जाया करते हैं। ऐसे में कुल मिलाकर जिले के सभी पत्रकार चाहे वे जिला मुख्यालय के हों या प्रखंड मुख्यालय के, सभी इस घटना के बाद से नक्सलियो के निशाने पर है।






