Om Thanvi : वरवरा राव ने 'हंस' के कार्यक्रम का बहिष्कार किया क्योंकि वहां (उनके खयाल में) ऐसे लोग बुलाए गए थे जो प्रेमचंद की "सामंतवाद-फासीवाद विरोधी धारा" के नहीं थे। … प्रेमचंद अहिंसावादी थे। माओवाद – नक्सलवाद के हिंसक विचारों वाले वरवरा राव कहाँ से अहिंसावादी हो गए?
प्रेमचंद जयंती पर आयोजित गोष्ठी के लिए हामी भरने में अगर वरवरा राव का अहिंसावादी होना जरूरी नहीं रहा, तो बाकी आमंत्रित वक्ताओं में अपनी पसंद का प्रेमचंद खोजने की उनकी कवायद किस तरह वाजिब है? मुझे संदेह है अचानक प्रेमचंद का झंडा उठा लेने वाले वरवरा राव ने "लाल क्रांति" का विरोध करने वाले प्रेमचंद को पढ़ा भी है!
ओम थानवी के फेसबुक वॉल से.






