मायावती की मूर्ति तोड़ने के आरोप में जेल में बंद पत्रकार शगुन त्यागी की जमानत हो गई है. उन्हें लखनऊ जेल से रिहा कर दिया गया. डिस्ट्रिक्ट जज केके शर्मा ने अदालत में जमानत पर सुनवाई के दौरान माना कि घटना में शगुन की संलिप्तता संदिग्ध है. शगुन नई दिल्ली में एक मैग्जीन में बतौर पत्रकार कार्यरत रहे हैं. पुलिस ने दावा किया कि शगुन ने मूर्ति तोड़े जाते समय वीडियो रिकार्डिग करने और पर्चे फेंकने की बात स्वीकार की. शगुन उत्तर प्रदेश नव निर्माण सेना के मीडिया प्रभारी का काम भी देखता है.
पुलिस का कहना है कि लखनऊ के गोमतीनगर थाने में पूछताछ के दौरान शगुन ने स्वीकारा कि 26 जुलाई को डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल के पास पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की मूर्ति तोड़ते समय उसी ने रिकार्डिग की थी और उसे नेट पर डाला था. उसने मीडियाकर्मियों को भी रिकार्डिग मुहैया कराई थी. इसके अलावा उसी ने वहां उत्तर प्रदेश नव निर्माण सेना की मांगों से जुड़े पर्चे भी फेंके थे. उत्तर प्रदेश नव निर्माण सेना का अध्यक्ष अमित जानी लखनऊ जिला जेल में बंद है. शगुन और पवन जेल में बंद अमित से मिलने गए थे, उसी समय पुलिस ने उन्हें अरेस्ट कर लिया.





