पिछले विधानसभा चुनाव में यूपी वालों ने समाजवादी पार्टी को इसलिए चुना क्योंकि लोग मायावती की कारपोरेटी राजनीति से ऊब चुके थे। मायावती के एक करीबी कारपोरेट घराने ने मुझे यूपी में विभिन्न स्थानों से अखबार निकालने के लिए आमंत्रित किया लेकिन वे महोदय शायद भूल गए कि अखबार स्वतंत्र एक सत्ता है जो बिल्डर्स या डेवलपर्स के बूते की बात नहीं है, जैसे ही मैंने अखबार खुदमुख्तार होकर निकालने की बात की उनके दो सहायक कूद पड़े, उनमें से एक यूपी का आईएएस रह चुका था दूसरा राजस्थान में आईआरएस।
बोले यह तो संभव नहीं है तो मैंने कहा कि फिर निकलवा लो अखबार किसी बिल्डर्स के दलाल पत्रकार से। ऐसे कल्चर से जनता ऊबी थी इसीलिए अखिलेश को चुना। भैया कारपोरेटी कल्चर के तो नहीं हैं लेकिन वे जिस बिरादरीवाद वाली कल्चर के हैं, उसमें उन्होंने सारे पद सिर्फ एक ही जाति के हवाले कर दिए जैसे यूपी उनकी जागीर हो।
वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल के एफबी वॉल से साभार.






