Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

विविध

मार सारे के…

Yashwant Singh : किसी ने ये मेरे पास भेजा है… आप भी पूरा पढ़िए… आनंद ना आए तो पैसे वापस… कसम से, सोचने को मजबूर करता है ये…

Yashwant Singh : किसी ने ये मेरे पास भेजा है… आप भी पूरा पढ़िए… आनंद ना आए तो पैसे वापस… कसम से, सोचने को मजबूर करता है ये…

मार सारे के….

उत्पन्न होने या नष्ट होने जैसा कुछ भी नहीं है. शरीर भी मरता नहीं है. शरीर पंच तत्व का बना हुआ है और वह अपने निर्माण के साथ ही विनाश की ओर अग्रसर होने लगता है और उन्हीं पंच तत्वों में विलीन हो जाता है. वह मरता नहीं है. तो क्या उस आत्मा की मृत्यु होती है, जिसकी चेतना से शरीर संचालित होता है? वेदांत के सिद्धांत और गीता में जगद्गुरु श्री कृष्ण परमात्मा के अनुसार आत्मा कभी मरता नहीं है. आत्मा कुछ करता या कराता नहीं है, वह मात्र साक्षी है. जिस प्रकार सूर्य मात्र प्रकाश देता है. उसका इस बात से कोई सम्बंध नहीं है कि उसके प्रकाश तले कौन पाप करता है और कौन पुण्य, लेकिन उसके प्रकाश के बिना पाप या पुण्य संभव नहीं है. इसी प्रकार आत्मा कुछ करता या कराता नहीं है, परंतु उसकी उपस्थिति के बिना कुछ भी संभव नहीं है. इस तरह आत्मा भी मरता नहीं है.

तब मरता कौन है? क्या मन मरता है? आत्मा साक्षी है और शरीर माध्यम. परंतु इस माध्यम को क्रियाशील करता है मन. हमारे शास्त्र मन शब्द से अटे पड़े हैं. यह मन ही है, जो हमें कर्म करने को प्रेरित करता है. हमारी अंदर इच्छाएँ और वासनाएँ पैदा करता है मन. शरीर की तमाम इन्द्रियों को उसके विषयों में रुचि तभी पैदा होती है, जब उससे मन का लगाव हो. उदाहरण के तौर पर हम किसी विवाह समारोह में मजेदार व्यंजन का स्वाद ले रहे हों, तभी अचानक जानकारी मिले कि आपके निकटस्थ परिजन की मृत्यु हो गई. यह खबर मिलते ही आपका भोजन से स्वाद उड़ जाएगा, क्योंकि आपका मन उस परिजन की ओर रुख कर चुका है. इस तरह देखें, तो हमारा जगत हमारा मन ही है. जहाँ मन होता है, वहीं जगत होता है. ये मन ही है, जो हमारे शरीर और आत्मा को अलग करता है. वह इच्छाएँ करता रहता है और हमें लगता है कि हमारी आत्मा तृप्त हो रही है. मन की इच्छाओं का कभी अंत नहीं होता और एक दिन यह शरीर जीर्ण होकर पंचमहाभूत में विलीन हो जाता है, परंतु मन तो अब भी मौजूद है. उसकी अधूरी इच्छाएँ पूर्ण करने के लिए वह सूक्ष्म स्वरूप धारण करता है. उसे सूक्ष्म मन या सूक्ष्म शरीर कहते हैं और जैसे ही वह हमारा जीर्ण शरीर छोड़ता है, तुरंत वह अपनी इच्छाएँ पूर्ण करने योग्य योनि में दाखिल हो जाता है. इस प्रकार देखें, तो मन भी नहीं मरता.

तो फिर वही सवाल…. कि मरता है कौन? सच्चाई तो ये है कि मरता है हमारा अहंकार. अहंकार की व्याख्या को लेकर आम जगत में भारी भ्रांतियाँ हैं. लोगों को लगता है कि हमें दौलत का अहंकार नहीं है, हमे पद का अहंकार नहीं है, हमें जाति या कुल का अहंकार नहीं है, अतः हम निरंकारी-अहंकाररहित हो गए. अहंकार की सच्ची व्याख्या जाननी हो, तो अहंकार के शाब्दिक अर्थ पर गौर करना होगा. अहंकार अर्थात् अहम्+कार अर्थात् मैं हूँ. एक देहधारी प्राणी के रूप में सबको इस बात का अहंकार तो है ही कि मैं फलाँ व्यक्ति, फलाँ नामधारी, फलाँ कुलधारी, फलाँ पदधारी या फलाँ उपाधिधारी व्यक्ति हूँ. बस जब भी मृत्यु होती है, तब इस अहम्+कार की ही मृत्यु होती है. ऐसी मृत्यु से उबरने का एक ही मार्ग है और वह है आत्म ज्ञान. जो व्यक्ति यह बात जान लेता है कि वह शरीर नहीं है, वह शुद्ध आत्मा है और मात्र साक्षी है, वही देहाभिमान से मुक्त हो सकता है और जो देहाभिमान से मुक्त हो जाता है, वह निश्चित रूप से इसी भव और इसी दुनिया में अपना अमरलोक स्थापित कर सकता है, क्योंकि वह अब जान चुका है कि उसका शरीर नहीं मरता, आत्मा भी नहीं मरता और मन भी नहीं मरता, मात्र अहंकार मरता है. यदि हम शरीर रूपी मृत्यु के भय से उबरना चाहते हैं, तो इस अहंकार यानी देहाभिमान का हमें आत्म ज्ञान द्वारा वध करना होगा और वो हमें मारे, उससे पहले उसे मार देना होगा.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...