पहले तो यह चर्चा भर थी कि प्रदेश टुडे अखबार मिड डे मील के भरोसे है पर यह चर्चा सही साबित हो रही है। ग्वालियर में डेढ़ माह पहले शुरू हुए प्रदेश टुडे का स्टॉफ मिड डे डील के भरोसे है। यहां काम करने वाले लोग बताते हैं कि जब भी स्टॉफ निर्धारित समय से ज्यादा समय आफिस में काम के लिए रुकता है, उसके लिए मिड डे डील के पैकेट का बंदोबस्त अखबार के संपादक करते हैं। वे कहीं पर टेलीफोन करते हैं और कुछ ही देर में मिड ड़े डील के जरूरत के अनुसार पैकेट आ जाते हैं। इन पैकेट से स्टॉफ अपना पेट भरता है और फिर काम पर जुट जाता है।
ऐसा महीने में कई बार होता है। अब यह मिड डे डील के पैकेट कहां से आते हैं, कौन लाता है और क्यों लाता है इसका जवाब तलाशने में ग्वालियर के मुखबिर पत्रकार जुट गए हैं। ऐसी ही चर्चा पिछले दिनों ग्वालियर में पत्रकारों के एक सम्मेलन में तब उठी जब सम्मेलन के बाद पत्रकार होटल में प्लेटें उठाकर होटल का खाना खा रहे थे। पत्रकारों का कहना था कि प्रदेश टुडे तो मिड डे डील के भरोसे चल रहा है। कुछ पत्रकारों ने इस बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि ग्वालियर में प्रदेश टुडे की ओपनिंग काफी पूअर रही है। छप पांच हजार रहा है पर बंट इसका भी तीस परसेंट पा रहा है। स्टॉफ काफी है और इनके बोझ से अखबार अभी से दबने लगा है और अब लोग यह अंदाज लगा रहे हैं कि मिड डे डील के भरोसे चल रहा अखबार कितना खिंच पाएगा।
ग्वालियर से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





