Ashish Maharishi : लीजिए अब मिलिए पत्रकारिता के 'आसाराम' से। जी हां ये हैं तहलका वाले तेजपाल। बेटी की सहेली के साथ दो बार यौन शोषण करने के बाद उनकी अंतरात्मा जागी और माफी मांग ली। हम अजीब समाज में जी रहे हैं। कभी साहित्य में 'आसाराम' पैदा हो रहे हैं तो कभी समाजसेवा के क्षेत्र में। धर्म और राजनीति में आसाराम की 'आसाराम' कोई नई बात नहीं है। लेकिन पत्रकारिता में पिछले कुछ सालों में तेजी से 'आसाराम' बढ़े हैं। मैं कई ऐसे 'आसाराम' को जानता हूं जो अपने ढीले नाड़ों की वजह से पत्रकारिता की अच्छी खासी नौकरी गवां चुके हैं। भगवान उनके नाड़ों में कसावट दे।
Suresh Chiplunkar : "तहलका" और "कोबरा पोस्ट" में इस समय कितनी महिला पत्रकार काम करती हैं?? यदि वे अब भी तेजपाल के खिलाफ अपना मुँह नहीं खोलतीं, तो मुझे उनके साथ सहानुभूति है… "उच्च आदर्शों" और "नैतिकता" का ढोल पीट-पीटकर मामले की लीपा-पोती करने का आरम्भ तो हो चुका है… देखना बाकी है कि महिला आयोग कब अपना मुँह खोलता है और तेजपाल की गिरफ्तारी कब होती है…
युवा पत्रकार आशीष महर्षि और चर्चित ब्लागर सुरेश चिपलूनकर के फेसबुक वॉल से.






