मिस्र के अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी का समर्थन करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए अल जजीरा के पत्रकार की बुधवार को कोर्ट में सुनवाई हुई. इस मामले में अल जजीरा के पत्रकार फादेल फहमी और ऑस्ट्रेलियन रिपोर्टर पीटर ग्रेस्टी समेत 20 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें से आठ हिरासत में हैं. इन पर प्रतिबंधित संगठन ब्रदरहुड के समर्थन और गलत रिपोर्ट दिखाने का आरोप है.
बुधवार को हुई सुनवाई में छह प्रतिवादी कैदी की सफेद यूनिफॉर्म पहने कटघरे में बंद कोर्ट में पेश हुए. इनमें ऑस्ट्रेलियन रिपोर्टर पीटर ग्रेस्टी और कनाडियन रिपोर्टर मोहम्मद फादेल फहमी भी थे. फहमी अल जजीरा के ब्यूरो चीफ थे, जिन्हें ग्रेस्टी के साथ दिसंबर में गिरफ्तार किया गया था.

अल जजीरा के रिपोर्टर फहमी ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि उन्हें यातनाएं दी जा रही हैं और चिकित्सा सुविधाएं भी नहीं मिल रहीं. उनका दायां कंधा पिछले 10 हफ्तों से टूटा हुआ है और इसके बाद भी उन्हें जमीन पर सोना पड़ रहा है. उन्होंने कनाडियन एंबेसी की जिम्मेदारी पर कोर्ट से खुद की रिहाई की अपील की. उन्होंने भरोसा दिलाया कि वो देश नहीं छोड़ेंगे. वहीं, फहमी के पिता ने अपने बेटे को निर्दोष बताया है. उन्होंने कहा कि जेल प्रशासन फहमी के ऑपरेशन की अनुमति नहीं दे रहा.
सुनवाई के दौरान सुरक्षा अधिकारियों ने बचाव पक्ष के वकील से कहा कि वो मीडिया से नहीं जुड़े हैं इसलिए उनके लिए अल जजीरा मुबाशर मिस्र और अल जजीरा इंग्लिश में फर्क करना मुश्किल है. लेकिन फहमी जिस चैनल के साथ काम कर रहे थे, उसने गलत खबरें दिखाईं. चैनल ने ब्रदरहुड का समर्थन किया, इसलिए ये ब्रदरहुड का सदस्य है. इस हाईप्रोफाइल मुकदमे को सैन्य समर्थित सरकार के दौर में मीडिया की आजादी के परीक्षण के तौर पर देखा जा रहा है. मामले की अगली सुनवाई अब 24 मार्च को होगी.






