जोधपुर। एएनएम भंवरी देवी अपहरण कांड के चलते बर्खास्त हुए जलदाय मंत्री महिपाल मदेरणा के समर्थकों ने रविवार को मीडिया को अपना निशाना बनाया। इससे एक बार तो एमडीएम अस्पताल में सुबह अराजकता का माहौल व्याप्त हो गया। इस घटना से आधा दर्जन मीडियाकर्मियों को चोटें आई हैं। कवरेज के दौरान टीवी चैनल के पत्रकार सहित तीन कैमरामैनों के साथ मदेरणा समर्थकों ने मारपीट की और ओबी वैन पर पथराव कर कांच फोड़ दिए। इससे हड़कंप मच गया।
मामले में शास्त्रीनगर पुलिस ने देर रात पालगांव के अणदाराम व ओसिया के अर्जुन को गिरफ्तार कर लिया गया। कहा जा रहा है कि दिल में दर्द के चलते शनिवार देर रात करीब 12 बजे महिपाल मदेरणा को आईसीयू में भर्ती करवाया गया था। रविवार को मदेरणा से मिलने के लिए उनकी बेटी दिव्या भी अस्पताल आई। मदेरणा की बेटी से जब निजी चैनलों के संवाददाताओं ने बाइट लेने की कोशिश की तब पीछे से मदेरणा समर्थकों की भीड़ ने पत्रकारों पर हमला बोल दिया। मदेरणा की पुत्री दिव्या ने पत्रकारों से कहा- यहां से भागो वरना अंजाम बुरा होगा। सूचना पाकर पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। ऐसी घटना फिर से न हो, इसके लिए स्थानीय प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस की तैनाती कर दी।
पत्रकारों के साथ मारपीट की राजस्थान पत्रकार संघ द्वारा निन्दा
उदयपुर : जोधपुर में एमडीएम हॉस्पीटल के बाहर कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ हुई मारपीट तथा कार्यालय एवं ओबी वैन में तोड़फोड़ की राजस्थान पत्रकार संघ, (जार) उदयपुर इकाई ने कड़ी निन्दा की है। जार अध्यक्ष डॉ. तुक्तक भानावत सहित शैलेष व्यास, सुमित गोयल, रमेश गर्ग, विनोद मोलपरिया, जगदीश विजयवर्गीय, रवि शर्मा, ललित पारीख, मांगीलाल जैन, दिनेश गोठवाल, पवन, भूपेन्द्र चौबीसा, कपिल श्रीमाली, प्रताप सिंह राठौड, अब्बास रिजवी, विशाल अग्रवाल, प्रशांत सिंह डोडिया, अजय आचार्य, संजय व्यास, राजेन्द्र हिलोरिया, मुकेश मुंदडा, अल्पेश लोढा, क्लोड डिसूजा, शांतिलाल जैन, पुरूषोत्तम शर्मा, संपत बापना ने कहा कि यह लोकतंत्र के चोथे स्तम्भ पर हमला है। जार ने सरकार से मांग की है कि हमलावरों को शीघ्र ही गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाये ताकि भविष्य में ऐसी अशोभनीय घटना की पुनरावृति न हो। सदस्यों ने इस तरह के लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए यह भी मांग की है कि प्रदेश के सभी पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान की जाय।
इस तरह के हमलों से कमजोर नहीं होगी पत्रकारिता
जोधपुर। जोधपुर में भंवरी देवी केस मामले में मदेरणा को कवर पहुंचे में पत्रकारों पर हमला हुआ मदेरणा समर्थकों ने सुनियोजित रणनीति बनाकर यह हमला किया। ऐसा पहली बार नहीं है जब पत्रकारों पर हमला किया गया हो। संपादकों के समूह बीईए ने इसकी कड़ी निंदा की है।
एनके सिंह (महासचिव, बीईए)
हम अपना काम सुनियोजित तरीके से कर रहे हैं। हमने समाज को आईना दिखाया है। हमारा काम होता है कि जनता को हकीकत दिखाएं। जिन्हें यह मंजूर नहीं होता वो हमला करते हैं। हम सरकार से कार्रवाई की मांग करेंगे। यदि उसने यह नहीं किया तो हम मानेंगे कि सरकार का विश्वास भी प्रजातंत्र में खत्म हो रहा है।
आशुतोष (IBN7, मैनेजिंग एडिटर)
यह किस्सा महज मदेरणा का नहीं है। इस जमात में खड़े नेताओं के अंदर एक अकड़ है। ये खुद को कानून-संविधान से ऊपर समझते हैं। लोकतंत्र का चौथे स्तंभ पर ऐसे हमलों से लोकतंत्र पर आंच आती है। देश में ऐसा कानून बनना चाहिए जिससे यदि कोई पत्रकारिता के काम में दखल दे तो उसके खिलाफ क्रिमिनल केस हो और उसे जेल के पीछे भेजने की कोशिश की जा सके।
ओम थानवी (जनसत्ता, संपादक)
इस तरह के हमलों से अंततः नुकसान आरोपियों को ही होगा। जो लोग हमला करते हैं, वो आखिर फायदा किसका कर रहे हैं? मीडिया की कुछ गाड़ियों, कैमरों का नुकसान करके क्या हो जाएगा? कोई अपराधी साबित नहीं हुआ है लेकिन किसी के समर्थन में इस तरह हमला करने से शक के निशान और गहरे हो जाते हैं।
आलोक मेहता (प्रधान संपादक, नई दुनिया)
हमलावरों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। स्वतंत्र मीडिया को स्वतंत्र रहकर दोषियों को सामने लाना काम रहते रहना होगा लेकिन सरकार पर भी दबाव होना चाहिए कि जो लोग भी इस तरह के हमलों के दोषी हों उनपर कार्रवाई की जाए।
हमले का शिकार हुए पत्रकार ने कहा कि हम लोग महेपाल मदेरणा की बेटी दिव्या मदेरणा से उनके पिता की हालत जानने आए थे। हम उनसे बात कर ही रहा था कि पीछे से भीड़ ने हमें पकड़ के गिराने की कोशिश की। हमें बुरी तरह से पीटा गया। दौड़ाया गया व भद्दी गालियां दी गईं। कैमरे तोड़ दिए गए। हमलावर महेपाल और दिव्या का नाम ले रहे थे।
मुख्तार अब्बास नकवी (बीजेपी)
यह हताश, निराश सरकार की बौखलाहट है। अब तक अंहकार और बेशर्मी देखी जा रही थी लेकिन अब अराजकता भी देखी जा रही है। मीडिया या आम जनता की मुहिम को इस तरह के हमले कमजोर नहीं कर सकते






