श्रीनगर : मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर समेत पूरे देश में मीडियाकर्मियों के लिए एक आचार संहिता लागू करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि मीडियाकर्मियों और हिंसक प्रदर्शनकारियों में फर्क के लिए जरूरी है कि वह कोई ऐसा निशान अपने साथ रखें जिसे पहचानने में सुरक्षाबलों को कोई गलती न हो। उमर ने यह सुझाव भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू के पत्र के जवाब में दिया।
काटजू ने अपने पत्र में लिखा था कि अगर सुरक्षाबलों ने मीडियाकर्मियों के साथ मारपीट की अपनी प्रवृत्ति को जारी रखा तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि बीते दिनों श्रीनगर के डाउन-टाउन में प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के प्रयास में पुलिसकर्मियों ने चार प्रेस छायाकारों को पीट दिया था। काटजू को लिखे अपने जवाब में उमर ने कहा, आपकी भावनाओं को मैं अच्छी तरह समझता हूं, लेकिन पुलिस की कभी भी यह मंशा नहीं रहती कि वह मीडियाकर्मियों को निशाना बनाए। घटनास्थल से दूर बैठकर हमारे लिए यह कहना बहुत आसान है कि पुलिस मीडियाकर्मियों के कैमरे देखकर पता लगाए कि वह प्रेसकर्मी हैं या प्रदर्शनकारी। लेकिन जब चारों तरफ नारेबाजी चल रही हो, प्रदर्शनकारी पत्थर फेंक रहे हों, आंसूगैस का इस्तेमाल किया जा रहा हो तब पुलिस द्वारा ऐसा किया जाना लगभग असंभव हो जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे हालात को दोबारा पैदा होने से रोकने के लिए सिर्फ राज्यों को लिख देना ही उचित नहीं है। इसकी जिम्मेदारी राज्य के साथ मीडिया और उससे भी ज्यादा प्रेस परिषद की है। उमर ने कहा कि बहुत से मुल्कों में मीडिया के लिए एक आचार संहिता है। विशेषकर जन आंदोलनों व हिंसक प्रदर्शनों की कवरेज के लिए, लेकिन हमारे देश में ऐसा कोई नियम कानून नहीं है। शायद अब समय आ गया है कि प्रेस परिषद राज्यों और मीडिया जगत के साथ विचार-विमर्श कर कोई आचार संहिता बनाए। मेरा सुझाव है कि जो भी पत्रकार प्रदर्शनकारियों की भीड़ में जाकर अपने लिए बेहतर तस्वीर जुटाना चाहते हैं वे कोई चमकीली जैकेट या बिब्स पहने, जिनके आधार पर वे दूर से ही पहचाने जा सकें। उमर ने कहा कि मैं मीडिया के कोड ऑफ कंडक्ट को तय करने में सहयोग के लिए हमेशा तैयार हूं। साभार : जागरण






