न्यूयार्क। मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वाच ने कहा है कि श्रीलंका को तत्काल प्रभाव से मीडिया प्रतिष्ठानों और पत्रकारों को परेशान करना बंद कर देना चाहिए। लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम [लिट्टे] के साथ सशस्त्र संघर्ष समाप्त होने बाद से अब तक के तीन वर्षो में राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की सरकार ने अपनी आलोचनाओं को खामोश करने के प्रयास किए हैं।
श्रीलंका सरकार के अपराध जांच विभाग ने 29 जून को अदालत के एक आदेश पर एक श्रीलंकाई समाचार वेबसाइट 'श्रीलंका मिरर' व विपक्षी यूनाइटेड नेशनल पार्टी की वेबसाइट 'श्रीलंका एक्स न्यूज' पर छापेमारी की कार्रवाई की थी। अधिकारियों ने दोनों वेबसाइट्स के कंप्यूटर व दस्तावेज जब्त और नौ लोगों को गिरफ्तार किया था। अधिकारियों का कहना था कि ये लोग श्रीलंका की झूठी व अनैतिक खबरों का प्रचार कर रहे थे।
संगठन ने कहा, 'सरकार ने केवल दो मीडिया प्रतिष्ठानों पर छापेमारी नहीं की, बल्कि आलोचना करने वाले सभी पत्रकारों को डराने व प्रताड़ित करने का प्रयास किया।' नवंबर 2011 में सरकार ने पांच वेबसाइट्स ब्लॉक कर दिए थे और फरमान जारी किया था कि राष्ट्रीय मामलों पर खबरे देने वाले सभी वेबसाइट्स या तो अपना पंजीकरण कराएं या कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहे। सरकार व लिट्टे के बीच तीन दशक तक चले संघर्ष में दोनों ओर से कई पत्रकारों को निशाना बनाया जा चुका है। (एजेंसी)






